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इजरायल-लेबनान संघर्ष: युद्धविराम के 24 घंटे बाद बड़ा हवाई हमला, ईरान की कड़ी चेतावनी

युद्धविराम के 24 घंटे बाद इजरायल का लेबनान पर सबसे बड़ा हमला, ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

मध्य पूर्व एक बार फिर गंभीर तनाव की चपेट में है। हाल ही में घोषित युद्धविराम के सिर्फ 24 घंटे बाद ही इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला कर दिया। इस हमले ने न केवल क्षेत्रीय शांति की उम्मीदों को झटका दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले को युद्ध शुरू होने के बाद से हिजबुल्लाह के खिलाफ सबसे बड़ा सैन्य अभियान बताया है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो इजरायल ईरान के खिलाफ भी फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।

10 मिनट में 100 ठिकानों पर हमला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली सेना ने महज 10 मिनट के अंदर लेबनान में लगभग 100 ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों का उद्देश्य हिजबुल्लाह के ठिकानों और उसकी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया है। हालांकि, इन हमलों में आम नागरिकों को भी भारी नुकसान हुआ है, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है।

युद्धविराम की घोषणा के बाद इस तरह का बड़ा हमला यह संकेत देता है कि जमीन पर हालात अभी भी बेहद अस्थिर हैं और किसी भी समय स्थिति और बिगड़ सकती है।

ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

इजरायल के इस कदम के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि लेबनान में हमले तुरंत नहीं रोके गए, तो ईरान ऐसा जवाब देगा जिसे उसके दुश्मन लंबे समय तक याद रखेंगे।

ईरान ने यह भी कहा है कि अमेरिका को अब यह तय करना होगा कि वह वास्तव में शांति चाहता है या इजरायल के माध्यम से संघर्ष को जारी रखना चाहता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में तनाव केवल इजरायल और हिजबुल्लाह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बड़ी ताकतें भी शामिल हो रही हैं।

अमेरिका की भूमिका पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में डोनल्ड ट्रंप और उनकी सरकार की भूमिका भी चर्चा में है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि इजरायल का यह हमला उनके ईरान के साथ हुए समझौते का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था।

वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि इस तरह के समझौतों में कुछ हद तक अस्थिरता या “उथल-पुथल” होना सामान्य बात है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका को इस स्थिति में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, ताकि संघर्ष को बढ़ने से रोका जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता खतरा

तनाव का असर अब समुद्री मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त चेतावनी दी है कि उसकी अनुमति के बिना गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि यहां किसी प्रकार का सैन्य टकराव होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, खासकर तेल की कीमतों पर।

मानवीय संकट गहराया

पिछले छह सप्ताह में लेबनान में चल रहे संघर्ष ने भारी तबाही मचाई है। अब तक करीब 1,500 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 130 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा, 10 लाख से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि यह संघर्ष केवल सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने तुरंत सहायता और युद्धविराम के पालन की अपील की है।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे। एक ओर इजरायल अपनी सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर ईरान और हिजबुल्लाह जवाबी कार्रवाई की तैयारी में हैं।

यदि स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। ऐसे में वैश्विक शक्तियों, खासकर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र, की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

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