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मलिहाबाद कसमंडी कलां विवाद: बड़े मंगल से पहले बढ़ी सुरक्षा, विवादित ढांचों पर पुलिस अलर्ट

मलिहाबाद के कसमंडी कलां में विवादित ढांचों को लेकर बढ़ी सुरक्षा, बड़े मंगल से पहले प्रशासन अलर्ट

हनुमान चालीसा पढ़ने की घोषणा के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के मलिहाबाद क्षेत्र स्थित कसमंडी कलां गांव इन दिनों एक विवादित ढांचे को लेकर चर्चा में है। बड़े मंगल से पहले प्रशासन ने गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। विवादित ढांचों के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन किसी भी तरह की तनावपूर्ण स्थिति से बचने के लिए लगातार निगरानी बनाए हुए है।

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब Suhaildev Army के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश पासी ने पुराने ढांचे पर पहुंचकर हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश की और दोबारा वहां पहुंचने की घोषणा की। इसके बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया।

क्या है पूरा मामला?

कसमंडी कलां गांव में मौजूद एक पुराने मकबरे और मस्जिद को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह पहले राजा कंस पासी का किला और शिव मंदिर था। इस मुद्दे को सबसे पहले 21 मई को Lakhan Army के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने उठाया था।

सूरज पासी का कहना है कि यह संरचना 980 से 1031 ईस्वी के बीच राजपासी राजा कंस पासी के शासनकाल से जुड़ी हुई है। उनका दावा है कि ढांचे की दीवारों और वास्तुकला में हिंदू परंपरा से जुड़ी कई आकृतियां और प्रतीक दिखाई देते हैं। इस दावे के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

योगेश पासी की घोषणा के बाद बढ़ी हलचल

शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे योगेश पासी विवादित ढांचे के पास पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने वहां हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश की और मंगलवार को फिर वहां पहुंचने की बात कही। उनकी इस घोषणा के बाद प्रशासन ने किसी भी संभावित विवाद को रोकने के लिए तुरंत सुरक्षा बढ़ा दी। गांव के सभी प्रमुख रास्तों और विवादित स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी को भी माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बागों और खेतों तक में तैनात की गई पुलिस

मलिहाबाद पुलिस ने सिर्फ मुख्य रास्तों पर ही नहीं बल्कि आसपास के बागों और खेतों में भी पुलिस कर्मियों की तैनाती की है। पुलिस को आशंका है कि कुछ लोग वैकल्पिक रास्तों से विवादित स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि पूरे क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से भी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि “सभी रास्तों पर पुलिस बल तैनात है। किसी भी प्रकार की अफवाह या शांति भंग करने की कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

पुरातत्व विभाग की टीम पहुंच सकती है

सूत्रों के अनुसार मंगलवार को पुरातत्व विभाग की एक टीम भी कसमंडी कलां पहुंच सकती है। टीम विवादित ढांचे का निरीक्षण कर उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संरचना का अध्ययन कर सकती है। हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन गांव में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। यदि पुरातत्व विभाग जांच करता है, तो यह मामला ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से और महत्वपूर्ण हो सकता है।

सांसदों और संगठनों से मांगा गया समर्थन

Lakhan Army के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने इस मुद्दे पर कई नेताओं और सांसदों से समर्थन मांगा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि यह “राजा कंस पासी का ऐतिहासिक किला” है जिसे बचाने की जरूरत है।उन्होंने R. K. Chaudhary, Awadhesh Prasad, Priya Saroj और Pushpendra Saroj सहित कई जनप्रतिनिधियों से समर्थन मांगा।इसके अलावा हरदोई, सीतापुर और आसपास के जिलों में नुक्कड़ सभाएं कर ग्रामीणों से “किला बचाने” के लिए साथ देने की अपील भी की गई।

सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस

कसमंडी कलां विवाद अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई लोग प्रशासन से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर #KasmandiKalan और #RajaKansPasi जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। हालांकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती: कानून व्यवस्था बनाए रखना

बड़े मंगल और धार्मिक आयोजनों के दौरान संवेदनशील मुद्दों को देखते हुए प्रशासन की चुनौती और बढ़ गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय लोगों से भी शांति बनाए रखने और किसी भी भड़काऊ बयान या गतिविधि से दूर रहने की अपील की गई है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि गांव में किसी भी तरह का सांप्रदायिक तनाव पैदा न हो और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।

क्या आगे बढ़ सकता है विवाद?

यदि पुरातत्व विभाग की जांच होती है और ऐतिहासिक दावों की पुष्टि या खंडन होता है, तो आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल प्रशासन का पूरा फोकस कानून व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों पर रोक लगाने पर है। कसमंडी कलां का यह मामला अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।

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