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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से तबाही: यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में फसलों को भारी नुकसान

देश के कई हिस्सों में अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। उत्तर भारत समेत कई राज्यों में शुक्रवार को हुई भारी बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने खड़ी और कटी हुई फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश में हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर

उत्तर प्रदेश में बीते 24 घंटे में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी और बारिश के कारण कई जिलों में गेहूं की खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई, जबकि खेतों में काटकर रखी गई सरसों भी भीग गई। इसके अलावा आम के बौर (फूल) भी तेज हवाओं के कारण गिर गए, जिससे आम उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।

सबसे दुखद बात यह रही कि वज्रपात (बिजली गिरने) से 10 लोगों की मौत हो गई। इनमें प्रयागराज में तीन, अमरोहा में दो और जौनपुर, मिर्जापुर, श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर में एक-एक व्यक्ति की जान गई। इसके अलावा कई लोग झुलस भी गए।

बिहार में भी फसलों को खतरा

बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर और मुजफ्फरपुर में भी मौसम के इस बदलाव का असर देखने को मिला। यहां गेहूं के साथ-साथ आम और लीची की फसल को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

हरियाणा और हिमाचल में भी नुकसान

हरियाणा में तेज हवाओं और बारिश के कारण हजारों एकड़ में गेहूं की फसल बिछ गई। यमुनानगर, हिसार, भिवानी और जींद जैसे क्षेत्रों में किसानों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं हिमाचल प्रदेश के मंडी में जलभराव के कारण टमाटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी और मटर की फसलें प्रभावित हुई हैं।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की स्थिति

मध्य प्रदेश के शिवपुरी और श्योपुर में आंधी और ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हो गईं। बड़वानी में बड़े आकार के ओलों ने गेहूं, चना और मक्का को भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि छत्तीसगढ़ में ओलों का आकार छोटा होने के कारण नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा।

कुछ राज्यों में बारिश बनी फायदेमंद

जहां कई राज्यों में बारिश नुकसानदेह साबित हुई, वहीं पंजाब और जम्मू और कश्मीर में इसे फसलों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय गेहूं की फसल में दाना बन रहा होता है, जिसके लिए हल्की ठंडक और नमी फायदेमंद होती है। इस बारिश से सिंचाई की जरूरत भी पूरी हो गई है।

आगे और खतरे की चेतावनी

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिन तक इसी तरह बारिश जारी रही, तो गेहूं, सरसों, आलू, चना और मसूर जैसी रबी फसलों के साथ-साथ खरबूजा, तरबूज, खीरा और लौकी जैसी सब्जियों को भारी नुकसान हो सकता है।

केंद्र सरकार अलर्ट

इस स्थिति को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को तुरंत फसल नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के साथ मिलकर नुकसान का सही आंकलन किया जाएगा और किसानों को जल्द राहत देने पर फोकस किया जाएगा। साथ ही बीमा क्लेम को सही तरीके से लागू करने पर भी जोर दिया गया है।

खरीदारी और MSP पर फोकस

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गेहूं और धान की खरीद जल्द शुरू होगी। इसके अलावा तुअर, मसूर और उड़द जैसी फसलों की खरीद NAFED और NCCF के माध्यम से की जाएगी, ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिल सके।

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कृषि पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। जहां कुछ राज्यों में यह बारिश फायदेमंद साबित हुई, वहीं कई जगहों पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अब सभी की नजर सरकार की राहत नीतियों और मौसम की अगली स्थिति पर टिकी है, क्योंकि आने वाले कुछ दिन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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