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केरल विधानसभा चुनाव 2026: मोदी-शाह की एंट्री से भाजपा का आक्रामक अभियान तेज

केरल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने इस बार पूरी ताकत झोंकने का फैसला कर लिया है। पार्टी ने अपने शीर्ष नेतृत्व को मैदान में उतारते हुए चुनावी अभियान को आक्रामक रूप देने की रणनीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह खुद इस अभियान की कमान संभालेंगे, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

भाजपा का आक्रामक रुख

अब तक केरल की राजनीति में सीमित प्रभाव रखने वाली भाजपा इस बार “खाता खोलने” के लक्ष्य के साथ मैदान में है। 140 सदस्यीय विधानसभा में सीट हासिल करना पार्टी के लिए प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

भाजपा का मानना है कि बदलते राजनीतिक माहौल और हालिया चुनावी सफलता ने उसे केरल में मजबूत आधार बनाने का मौका दिया है। यही कारण है कि पार्टी ने अपने सबसे बड़े चेहरों को चुनाव प्रचार में उतारने का निर्णय लिया है।

मोदी के तूफानी दौरे

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्य में दो बड़े दौरे करेंगे। इन दौरों के दौरान वे कई जनसभाओं को संबोधित करेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे।इन रैलियों का फोकस उन क्षेत्रों पर होगा जहां भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इनमें कासरगोड, पलक्कड़, तिरुअनंतपुरम, कोल्लम और त्रिशूर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है और पिछले चुनावों में भी पार्टी ने यहां कुछ मजबूती दिखाई थी।

अमित शाह और अन्य नेताओं की भूमिका

प्रधानमंत्री के साथ-साथ अमित शाह भी चुनावी मैदान में सक्रिय रहेंगे। इसके अलावा भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता भी केरल का दौरा करेंगे। इससे साफ है कि भाजपा इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है और किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहती।

सुरेश गोपी की जीत से बढ़ा आत्मविश्वास

भाजपा को केरल में हाल ही में मिली चुनावी सफलताओं ने काफी उत्साहित किया है। खासकर सुरेश गोपी की त्रिशूर लोकसभा सीट पर बड़ी जीत ने पार्टी का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने 70,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल कर यह संकेत दिया कि भाजपा के लिए केरल में संभावनाएं बन रही हैं। इसके अलावा स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

तिरुअनंतपुरम में बड़ी सफलता

दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने तिरुअनंतपुरम नगर निगम पर नियंत्रण हासिल किया। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केरल में परंपरागत रूप से वामपंथी और कांग्रेस गठबंधन का दबदबा रहा है। इस सफलता ने भाजपा को यह भरोसा दिलाया है कि वह धीरे-धीरे राज्य में अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है।

क्या बदल रहा है केरल का राजनीतिक समीकरण?

केरल की राजनीति लंबे समय से दो मुख्य गठबंधनों—एलडीएफ और यूडीएफ—के बीच घूमती रही है। लेकिन भाजपा अब इस समीकरण को बदलने की कोशिश में है। पार्टी का फोकस उन मतदाताओं पर है जो पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प तलाश रहे हैं। इसके लिए भाजपा राष्ट्रवाद, विकास और केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रमुख मुद्दा बना रही है।

चुनावी रणनीति: जमीनी स्तर पर फोकस

भाजपा की रणनीति सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियों तक सीमित नहीं है। पार्टी जमीनी स्तर पर भी संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

  • बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाई जा रही है
  • सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेन को तेज किया गया है
  • युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को टारगेट किया जा रहा है

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