फरसे वाले बाबा चंद्रशेखर का निधन: ब्रज में शोक, हाईवे जाम और हिंसा से मचा हड़कंप
फरसे वाले बाबा चंद्रशेखर का निधन: ब्रज में शोक और बवाल
ब्रज क्षेत्र में चंद्रशेखर बाबा, जिन्हें “फरसे वाले बाबा” के नाम से जाना जाता था, एक चर्चित गोसेवक और संन्यासी थे। मूल रूप से फिरोजाबाद के नगला भूपाल (सिरसागंज) के निवासी बाबा ने महज 19 साल की उम्र में सांसारिक जीवन त्याग दिया था। उन्होंने अयोध्या में कार सेवा में भाग लेने के बाद संन्यास लिया और अपना जीवन पूरी तरह गोरक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उनके माता-पिता का निधन बचपन में ही हो गया था, जिसके बाद उन्होंने वैराग्य का मार्ग अपनाया।
गोरक्षा ही जीवन का उद्देश्य
फरसे वाले बाबा की पहचान उनके हाथ में रहने वाले 15 किलो के फरसे से जुड़ी थी, जो उनके लिए सिर्फ हथियार नहीं बल्कि गोरक्षा का प्रतीक था। बरसाना, नंदगांव और कोसीकलां सहित पूरे ब्रज क्षेत्र में उनकी अलग पहचान थी।
- उन्होंने गोरक्षकों की एक टीम बनाई थी
- गो तस्करी की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच जाते थे
- सैकड़ों गायों को बचाने का दावा किया जाता है
- उनकी गोशाला में करीब 400 गायों की देखभाल होती थी
उनकी दिनचर्या बेहद सादा थी। कहा जाता है कि वह एक आलू खाकर पूरा दिन गुजार लेते थे और रात में सड़कों पर घूमकर निराश्रित गायों की देखभाल करते थे।
कई हमलों के बावजूद नहीं डिगे
गोरक्षा के अपने मिशन के दौरान बाबा पर कई बार जानलेवा हमले भी हुए। वर्ष 2012 और 2015 में हुए हमलों में वह बाल-बाल बचे, लेकिन उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा। उनके समर्थक उन्हें केवल एक संत नहीं, बल्कि “गोरक्षा के योद्धा” के रूप में देखते थे।
सड़क हादसे में मौत, हत्या के लगे आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार तड़के करीब 4 बजे चंद्रशेखर बाबा की एक ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई। हालांकि, उनके समर्थकों ने इसे साधारण हादसा मानने से इनकार करते हुए संदिग्ध गोतस्करों पर हत्या का आरोप लगाया। इसी आरोप ने पूरे मामले को और भड़का दिया।
शव के साथ हाईवे जाम, बढ़ा तनाव
बाबा की मौत की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग जुट गए। समर्थक शव को लेकर छाता पहुंचे और आगरा-दिल्ली हाईवे पर जाम लगा दिया।
- सुबह 7 बजे हाईवे जाम किया गया
- गोतस्करों पर कार्रवाई की मांग उठी
- कई घंटे तक यातायात ठप रहा
एंबुलेंस और बसें भी जाम में फंस गईं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी हुई।
पुलिस से झड़प और हिंसा
स्थिति उस समय बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई।
- पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई
- अधिकारियों के वाहनों में तोड़फोड़
- करीब दो दर्जन वाहन क्षतिग्रस्त
- कई पुलिसकर्मी घायल
हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
चार घंटे तक अराजकता
करीब चार घंटे तक पूरे क्षेत्र में तनाव और अराजकता का माहौल बना रहा। बताया जा रहा है कि उस समय वीवीआईपी ड्यूटी और ईद के कारण पुलिस बल पहले से ही व्यस्त था, जिससे मौके पर पर्याप्त फोर्स नहीं पहुंच सकी। बाद में अतिरिक्त पुलिस बल के साथ वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और हालात को काबू में किया गया।
समर्थकों की मांग: “गो पुत्र शहीद” का दर्जा
बाबा के समर्थकों ने उन्हें “गो पुत्र शहीद” का दर्जा देने की मांग की है। उनका कहना है कि बाबा ने अपना पूरा जीवन गोरक्षा के लिए समर्पित किया और उन्हें आधिकारिक सम्मान मिलना चाहिए। चंद्रशेखर बाबा का निधन न केवल ब्रज क्षेत्र के लिए एक भावनात्मक क्षति है, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
एक ओर जहां उनके समर्थक उन्हें गोरक्षा का प्रतीक मानते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी मौत के बाद हुई हिंसा यह दिखाती है कि भावनात्मक मुद्दे किस तरह बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—सच्चाई सामने लाना और क्षेत्र में शांति बनाए रखना।
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