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चमोली में भारी बर्फबारी और बारिश: बदरीनाथ धाम माइनस तापमान, हाईवे बंद

उत्तराखंड के चमोली जिला में हाल ही में हुई बारिश और बर्फबारी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। ऊंचाई वाले कई गांवों में जहां ताजा बर्फबारी हुई, वहीं तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बर्फ ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और जल्दी पिघल गई, लेकिन मौसम के इस बदलाव ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

चमोली जिले के ऊंचाई वाले गांव जैसे पाणा, ईराणी, झींझी, सुतोल, कनोल, रामणी और पडेरगांव सहित 50 से अधिक गांवों में बारिश के साथ बर्फबारी हुई। इन इलाकों में ठंड अचानक बढ़ गई, जिससे स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी इसी तरह का मौसम बना रह सकता है।

प्रमुख तीर्थ स्थल बदरीनाथ धाम में तापमान माइनस चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यहां लगातार बर्फबारी के चलते पूरा क्षेत्र बर्फ की चादर से ढक गया है। तीन दिन तक लगातार बर्फबारी और बारिश के बाद जब मौसम साफ हुआ, तो धाम का दृश्य बेहद मनमोहक नजर आया।

हालांकि इस सुंदरता के साथ-साथ कई समस्याएं भी सामने आई हैं। भारी बारिश के बाद ज्योतिर्मठ क्षेत्र में पहाड़ दरकने लगे हैं, जिससे भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। इसका असर सड़कों और यातायात पर भी पड़ा है।

बदरीनाथ हाईवे गोविंद घाट के पास पिनोला क्षेत्र में बड़े-बड़े पत्थर गिरने से पूरी तरह बंद हो गया है। इसके अलावा नीति-मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग भी सालधर के पास भूस्खलन के कारण बाधित हो गया है। प्रशासन ने सीमा सड़क संगठन (BRO) को जल्द से जल्द रास्ता खोलने के निर्देश दिए हैं।

दूसरी ओर गंगोत्री हाईवे और यमुनोत्री हाईवे भी बर्फबारी के कारण प्रभावित हुए हैं। यमुनोत्री हाईवे जंगलचट्टी के पास बंद पड़ा है, जिसे खोलने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सड़कों के बंद होने से लोगों की आवाजाही काफी मुश्किल हो गई है।

बर्फबारी का असर केवल यातायात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विकास कार्य भी प्रभावित हुए हैं। बदरीनाथ धाम में चल रहे मास्टर प्लान के कार्य पिछले दो दिनों से पूरी तरह ठप पड़े हैं। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने वहां काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का निर्णय लिया।

इस समय बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत 100 से अधिक श्रमिक और अभियंता काम कर रहे हैं। उन्हें अस्थायी टेंट और टिन शेड में रखा गया था, लेकिन खराब मौसम और बर्फबारी के चलते उन्हें पांडुकेश्वर की ओर भेजा गया। हालांकि कंचन नाले के पास हिमखंड गिरने से हाईवे बंद हो गया, जिसके कारण मजदूरों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।

अधिकारियों के अनुसार, लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण ग्लेशियर तेजी से खिसक रहे हैं, जिससे हिमस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में मजदूरों को पैदल हाईवे पार कराना जोखिम भरा था, इसलिए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ही रोक दिया गया।

प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उप जिलाधिकारी ने बताया कि जैसे ही मौसम साफ होगा और रास्ते सुरक्षित होंगे, तब ही आवाजाही को बहाल किया जाएगा। फिलहाल BRO की टीमें लगातार सड़कों को खोलने में जुटी हुई हैं।

पिछले तीन दिनों से जिले में रुक-रुक कर हो रही बारिश और बर्फबारी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बदरीनाथ धाम में करीब दो फीट और हेमकुंड साहिब में तीन फीट तक ताजा बर्फ जमा हो चुकी है। इसके अलावा नीति और माणा घाटी के गांवों में भी बर्फ की मोटी परत देखी गई है।

हालांकि आज मौसम साफ होने के बाद धूप खिली है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली है। लेकिन अभी भी कई मार्ग बंद होने के कारण सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है।

कुल मिलाकर, चमोली जिले में मौसम के इस बदलाव ने जहां प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा दिया है, वहीं लोगों के लिए कई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियां स्थिति को सामान्य करने में जुटी हैं और लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

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