केदारनाथ में श्रद्धालु की हार्ट अटैक से मौत, हेलीकॉप्टर न मिलने पर उठा विवाद, DM पर गंभीर आरोप
केदारनाथ में श्रद्धालु की मौत के बाद हेलीकॉप्टर विवाद: परिजनों ने DM पर लगाए गंभीर आरोप
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित केदारनाथ धाम से एक संवेदनशील और विवादास्पद मामला सामने आया है, जिसने तीर्थयात्रा व्यवस्थाओं और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां गुजरात से आए एक श्रद्धालु की कथित तौर पर हार्ट अटैक से मौत हो गई, जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर सुविधा को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया।
हार्ट अटैक से श्रद्धालु की मौत
मिली जानकारी के अनुसार, गुजरात के रहने वाले दिलीप भाई माली केदारनाथ यात्रा पर आए हुए थे। यात्रा के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। ऊंचाई, ठंड और ऑक्सीजन की कमी जैसे कारणों से केदारनाथ क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
स्थानीय प्रशासन और चिकित्सा टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
डेडबॉडी को ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर को लेकर विवाद
मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब मृतक के बेटे हेमंत माली ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पिता के पार्थिव शरीर को नीचे लाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा की मांग की थी। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन उन्हें तुरंत मदद नहीं मिली।
आरोप के मुताबिक, विशाल मिश्रा (जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग) ने हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने में देरी का कारण DGCA की NOC (अनापत्ति प्रमाणपत्र) न होना बताया।
DM पर उठे सवाल
परिजनों का आरोप है कि जब उन्हें NOC का हवाला देकर हेलीकॉप्टर नहीं दिया गया, उसी दौरान जिलाधिकारी स्वयं अपनी टीम के साथ हेलीकॉप्टर से रवाना हो गए। इस दावे के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर कई सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि DGCA की अनुमति नहीं थी, तो प्रशासनिक अधिकारी किस आधार पर हेलीकॉप्टर से यात्रा कर सके? क्या नियम आम नागरिकों और अधिकारियों के लिए अलग-अलग हैं?
देरी से मिला हेलीकॉप्टर
बताया जा रहा है कि सुबह केदारनाथ हेलीपैड पर पार्थिव शरीर पहुंच गया था, लेकिन हेलीकॉप्टर की सुविधा दोपहर करीब 12:30 बजे जाकर उपलब्ध हो सकी। इस देरी ने परिजनों के दुख को और बढ़ा दिया।
प्रशासन की चुप्पी और जांच की मांग
इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि घटना के बाद जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन को अधिक मानवीय और तत्पर रवैया अपनाना चाहिए।
केदारनाथ यात्रा में स्वास्थ्य जांच की जरूरत
यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि केदारनाथ यात्रा पर जाने से पहले मेडिकल जांच बेहद जरूरी है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी, ठंड और लंबी पैदल यात्रा हृदय रोगियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि यात्रा से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए और यदि कोई गंभीर बीमारी है तो यात्रा से बचना चाहिए।
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