GST चोरों पर उत्तराखंड में बड़ा एक्शन, 16 बिल्डरों पर एक साथ पड़ा छापा; 7 करोड़ से ज्यादा वसूल
उत्तराखंड के रियल एस्टेट कारोबार में कथित जीएसटी अनियमितताओं को लेकर राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) और प्रवर्तन इकाइयों ने देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी में एक साथ 16 बिल्डरों और उनसे जुड़ी फर्मों के व्यावसायिक परिसरों पर जांच अभियान चलाया।
इस कार्रवाई के दौरान विभाग की टीमों ने मौके पर ही 7.73 करोड़ रुपये की राशि जमा कराई। इसके साथ ही कई प्रतिष्ठानों से बिक्री, भुगतान, निर्माण कार्य, रजिस्ट्री और जीएसटी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिए गए हैं।
16 टीमों के साथ 55 अधिकारियों ने संभाला मोर्चा :
राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के निर्देश पर प्रदेशभर में यह कार्रवाई 16 अलग-अलग टीमों के माध्यम से की गई। अभियान में कुल 55 अधिकारी शामिल रहे। टीमों ने संबंधित बिल्डरों के कारोबारी लेनदेन और टैक्स से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।
विभाग के मुताबिक, कब्जे में लिए गए दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल के बाद वास्तविक कर देयता का आकलन किया जाएगा। जांच में यदि अतिरिक्त कर चोरी या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित फर्मों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई हो सकती है।
कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बाद रजिस्ट्री दिखाकर टैक्स बचाने की जांच
रियल एस्टेट क्षेत्र में आवासीय परियोजनाओं पर लागू जीएसटी व्यवस्था भी विभाग की जांच के दायरे में है। किफायती आवास पर एक प्रतिशत और अन्य आवासीय संपत्तियों पर पांच प्रतिशत जीएसटी की व्यवस्था है। पांच प्रतिशत वाले मामलों में इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रावधान नहीं होता।
जांच के दौरान ऐसे मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां आरोप है कि खरीदार से फ्लैट की पूरी या अधिकांश रकम पहले ही ले ली गई, लेकिन संपत्ति की रजिस्ट्री परियोजना का कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद दिखाई गई।
विभाग अब यह पड़ताल कर रहा है कि कहीं लेनदेन को कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बाद का बताकर जीएसटी देयता से बचने की कोशिश तो नहीं की गई। इस तरह के मामलों में भुगतान की तारीख, रजिस्ट्री और परियोजना से संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
अपनी ही फर्मों के जरिए आईटीसी लेने के आरोपों की भी पड़ताल
जांच में बिल्डरों से जुड़ी निर्माण कंपनियों की भूमिका भी सामने आई है। विभाग को कुछ मामलों में ऐसी व्यवस्था की जानकारी मिली है, जिसमें बिल्डरों ने अपनी ही निर्माण से संबंधित फर्मों के जरिए परियोजना का काम कराया।
ऐसी निर्माण सेवाओं पर निर्धारित परिस्थितियों में 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होता है और नियमों के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा सकता है। हालांकि, विभाग को संदेह है कि कुछ मामलों में कागजों पर खरीद दिखाकर अनुचित तरीके से आईटीसी का लाभ लेने का प्रयास किया गया।
अब वास्तविक खरीद, संबंधित बिल, भुगतान और दस्तावेजों में दर्ज कारोबार का आपस में मिलान किया जा रहा है।
15 दिन तक जुटाई गई कारोबारी जानकारी, फिर एक्शन
राज्य कर विभाग ने रियल एस्टेट सेक्टर से अपेक्षित राजस्व नहीं मिलने के बाद इस क्षेत्र की गतिविधियों का विश्लेषण शुरू किया था। इसके बाद बिल्डरों और उनसे जुड़ी संविदाकार फर्मों के लेनदेन की जानकारी जुटाई गई।
राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के निर्देश पर नोडल अधिकारी एवं संयुक्त आयुक्त अजय कुमार के समन्वय में प्रवर्तन इकाइयों ने करीब 15 दिनों तक संबंधित कारोबारियों के संव्यवहार और अन्य कारोबारी सूचनाओं का अध्ययन किया। जानकारी जुटाने के बाद अलग-अलग स्थानों पर एक साथ जांच अभियान चलाया गया।
दस्तावेजों की जांच के बाद बढ़ सकती है कार्रवाई
छापेमारी के दौरान कब्जे में लिए गए रिकॉर्ड में बिक्री, ग्राहकों से प्राप्त भुगतान, संपत्ति की रजिस्ट्री, कंप्लीशन सर्टिफिकेट, निर्माण कार्य, खरीद और इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं।
राज्य कर विभाग के अनुसार, फिलहाल जांच जारी है। दस्तावेजों और कारोबारी लेनदेन की विस्तृत जांच के बाद यदि अतिरिक्त कर देयता या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित बिल्डरों और फर्मों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि रियल एस्टेट कारोबार में कर अनुपालन पर निगरानी आगे भी जारी रहेगी।













