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Lucknow Gas Cylinder Crisis: कॉमर्शियल सिलिंडर सप्लाई बंद, स्ट्रीट फूड वेंडर और 5 लाख लोगों के खाने पर संकट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोक लगने के बाद खानपान से जुड़े कारोबार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासकर स्ट्रीट फूड वेंडरों, छोटे रेस्टोरेंटों और ढाबा संचालकों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। इन छोटे कारोबारियों के पास आमतौर पर गैस सिलिंडरों का सीमित स्टॉक होता है, जो एक या दो दिन में खत्म हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही गैस की सप्लाई शुरू नहीं हुई तो राजधानी में करीब पांच लाख लोगों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो सकता है।

स्ट्रीट फूड और छोटे रेस्टोरेंट पर सबसे ज्यादा असर

लखनऊ में बड़ी संख्या में लोग रोजाना स्ट्रीट फूड, छोटे होटल और ढाबों पर निर्भर रहते हैं। यहां काम करने वाले मजदूर, दिहाड़ी कामगार, नौकरीपेशा लोग और छात्र बड़ी संख्या में इन जगहों पर खाना खाते हैं।

चारबाग क्षेत्र से जुड़े होटल और रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े अनिल विरमानी के मुताबिक अगर व्यावसायिक सिलिंडर की सप्लाई बंद रही तो इसका सीधा असर हजारों छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो घर पर खाना नहीं बनाते और पूरी तरह ढाबों, टिफिन सर्विस और स्ट्रीट फूड पर निर्भर रहते हैं। ऐसी स्थिति में गैस की कमी से इन लोगों के सामने भोजन की समस्या खड़ी हो सकती है।

नौकरीपेशा और छात्रों पर भी पड़ेगा असर

राजधानी लखनऊ में बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले नौकरीपेशा लोग रहते हैं। इसके अलावा करीब 25 हजार से ज्यादा विद्यार्थी भी अलग-अलग शहरों से यहां पढ़ाई करने आते हैं।

इनमें से अधिकांश छात्र और कामकाजी लोग अपने भोजन के लिए छोटे रेस्टोरेंट, ढाबों और टिफिन सर्विस पर निर्भर रहते हैं। अगर व्यावसायिक गैस सिलिंडर की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो इन लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो सकता है।

लखनऊ विश्वविद्यालय में सात दिन का गैस स्टॉक

Lucknow University के छात्रावासों में रहने वाले छात्रों पर भी इस संकट का असर पड़ सकता है। विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर और जानकीपुरम स्थित नए परिसर को मिलाकर कुल 18 छात्रावास हैं।

इन छात्रावासों में लगभग दो हजार छात्र-छात्राएं रहते हैं, जिनके लिए नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन मेस में तैयार किया जाता है। विश्वविद्यालय के चीफ प्रोवोस्ट प्रो. अनूप कुमार सिंह के अनुसार फिलहाल छात्रावासों की मेस में गैस का स्टॉक सीमित है और अधिकतम सात दिन तक ही काम चल सकता है।

उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का गैस आपूर्ति पर इतना असर पड़ेगा, इसकी पहले किसी को उम्मीद नहीं थी।

युद्ध लंबा चला तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

प्रो. अनूप कुमार सिंह का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है और गैस की आपूर्ति जल्द शुरू नहीं होती तो मेस संचालन में गंभीर दिक्कतें आ सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को भूखा नहीं रहने देगा और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

अन्य संस्थानों में भी संकट की आशंका

लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र में स्थित Central Sanskrit University, Atal Residential School और Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya के छात्रावासों में रहने वाले करीब 1800 विद्यार्थियों के भोजन पर भी असर पड़ने की आशंका है।

इन छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राएं पूरी तरह मेस पर निर्भर रहते हैं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्व नारायण झा के अनुसार छात्रावास में रोजाना करीब 10 गैस सिलिंडर की खपत होती है, लेकिन सोमवार को केवल तीन सिलिंडर ही मिल पाए।

वहीं अटल आवासीय विद्यालय के प्रधानाचार्य सुखवीर सिंह ने बताया कि यहां टेंडर के माध्यम से छात्रों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है और व्यावसायिक गैस की आपूर्ति रुकने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

कुछ विश्वविद्यालयों में फिलहाल राहत

हालांकि शहर के कुछ बड़े शिक्षण संस्थानों में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। Babasaheb Bhimrao Ambedkar University और Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University में कैंटीन और छात्रावासों की मेस के लिए लगभग 12 दिन तक गैस का इंतजाम बताया जा रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार फिलहाल कोई बड़ी परेशानी नहीं है, लेकिन अगर संकट लंबा चलता है तो यहां भी समस्या पैदा हो सकती है।

रोजी-रोटी पर भी पड़ सकता है असर

व्यावसायिक गैस सिलिंडर की आपूर्ति रुकने से केवल भोजन की समस्या ही नहीं, बल्कि हजारों छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ सकता है। शहर में बड़ी संख्या में लोग स्ट्रीट फूड, ढाबा और छोटे होटल चलाकर अपना गुजारा करते हैं।

अगर जल्द ही गैस की सप्लाई बहाल नहीं होती तो इन कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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