रामजन्मभूमि परिसर में सूर्य मंदिर पर धर्म ध्वजा का भव्य आरोहण, संतों की मौजूदगी में संपन्न हुआ अनुष्ठान
अयोध्या में सूर्य मंदिर पर धर्म ध्वजा का आरोहण, धार्मिक उल्लास का माहौल
अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि परिसर में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ, जब सूर्य मंदिर के शिखर पर विधिवत रूप से धर्म ध्वजा का आरोहण किया गया। इस विशेष अवसर पर संतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
यह आयोजन श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्वावधान में संपन्न हुआ। सुबह लगभग 10 बजे प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में सबसे पहले आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की। इसके बाद विधिपूर्वक ध्वज को मंदिर के लगभग 70 फीट ऊंचे शिखर पर चढ़ाया गया।
पूजा और विधि-विधान के साथ हुआ आयोजन
ध्वजारोहण से पहले मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार कर पूजा की गई। यह परंपरा हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि ध्वजा को धर्म और आस्था का प्रतीक माना जाता है।
डोरी की सहायता से ध्वज को धीरे-धीरे शिखर तक पहुंचाया गया। इस दौरान उपस्थित संतों और मंदिर प्रशासन के सदस्यों ने मिलकर इस प्रक्रिया को सफल बनाया। पूरे आयोजन के दौरान भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
सूर्य मंदिर का विशेष महत्व
रामजन्मभूमि परिसर में स्थित यह सूर्य मंदिर परकोटे के दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) कोने में बनाया गया है। मंदिर की वास्तुकला और इसकी धार्मिक महत्ता इसे विशेष बनाती है। यहां स्थापित भगवान सूर्यदेव की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा पिछले वर्ष 5 जून को योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई थी।
सूर्य देव हिंदू धर्म में ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए इस मंदिर में ध्वजारोहण जैसे आयोजन का विशेष धार्मिक महत्व है। यह न केवल मंदिर की परंपरा को आगे बढ़ाता है बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था को भी मजबूत करता है।
संतों की रही विशेष उपस्थिति
इस धार्मिक आयोजन में कई प्रमुख संतों और धार्मिक गुरुओं ने भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से महंत कमलनयन दास, देवेंद्रप्रसादाचार्य, वैदेहीवल्लभशरण, श्रीधराचार्य, मैथिलीरमणशरण और रामशरणदास शामिल रहे।इन संतों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। संत समाज ने इस अवसर को धार्मिक एकता और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक बताया।
प्रशासन और ट्रस्ट की भूमिका
ध्वजारोहण कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों ने आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराया।सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी विशेष व्यवस्था की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
धर्म ध्वजा का आरोहण केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यह आयोजन यह दर्शाता है कि रामजन्मभूमि परिसर में धार्मिक गतिविधियां निरंतर जारी हैं और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा लोगों को आकर्षित कर रही है।
अयोध्या, जो पहले से ही एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत कर रही है। सूर्य मंदिर में हुआ यह ध्वजारोहण आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष अनुभव बन गया।
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