देहरादून में बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों का उग्र आंदोलन, अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस पर मनाया ‘ब्लैक डे’
देहरादून में बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों का उग्र आंदोलन, अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस पर मनाया ‘ब्लैक डे’
Dehradun के परेड ग्राउंड में चल रहा बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन अब लगातार उग्र होता जा रहा है। बीते 30 घंटे से अधिक समय से कई नर्सिंग अभ्यर्थी पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि उनके साथी नीचे धरने पर बैठे हुए हैं। तेज धूप और बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग वर्षवार नियुक्ति को लेकर है। उनका कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे हजारों प्रशिक्षित नर्सिंग युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। आंदोलनकारी साफ कह चुके हैं कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस पर बेरोजगार नर्सों का विरोध
आज पूरी दुनिया में International Nurses Day मनाया जा रहा है, लेकिन देहरादून में प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों के लिए यह दिन खुशी नहीं बल्कि निराशा लेकर आया। आंदोलनकारियों ने इस दिन को “ब्लैक डे” के रूप में मनाया और सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष Nawal Pundir ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस उन लोगों के लिए खास हो सकता है जिन्हें रोजगार मिल चुका है, लेकिन बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों के लिए यह दिन संघर्ष और पीड़ा की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मौके पर युवाओं को रोजगार का तोहफा देना चाहिए था।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि सुबह से उन्हें नर्सिंग दिवस की शुभकामनाओं के संदेश मिल रहे हैं, लेकिन नौकरी न होने की वजह से वे इन शुभकामनाओं को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक ऐसे दिवस उनके लिए कोई मायने नहीं रखते।
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला भी आंदोलन में शामिल
नर्सिंग अभ्यर्थियों के समर्थन में Jyoti Rautela भी पानी की टंकी पर चढ़ गई हैं। उन्होंने सरकार पर युवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक वे आंदोलनकारियों के साथ खड़ी रहेंगी।
ज्योति रौतेला ने कहा कि उत्तराखंड में लगातार बढ़ती बेरोजगारी युवाओं के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग करते हुए कहा कि प्रशिक्षित नर्सिंग अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार कराना उचित नहीं है।
प्रशासन पर लगाए तानाशाही रवैये के आरोप
आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नवल पुंडीर का कहना है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ तानाशाही जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि पानी की टंकी पर बैठे प्रदर्शनकारियों तक खाना और पानी पहुंचाने में भी प्रशासन बाधाएं खड़ी कर रहा है।
धरने पर बैठीं मधु उनियाल ने कहा कि पिछले 159 दिनों से नर्सिंग अभ्यर्थी लगातार अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने कहा कि सरकार की अनदेखी से युवाओं में भारी नाराजगी और निराशा का माहौल है।
मधु उनियाल ने कहा कि प्रशिक्षित नर्सिंग अभ्यर्थियों को नौकरी न मिलना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ की कमी होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में देरी समझ से परे है।
स्वास्थ्य महानिदेशिका के साथ प्रस्तावित वार्ता पर टिकी निगाहें
आज आंदोलनकारी प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य महानिदेशिका के बीच बैठक प्रस्तावित है। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि इस बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक चर्चा होगी। हालांकि आंदोलनकारी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि बैठक बेनतीजा रही, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
नर्सिंग एकता मंच के सदस्यों का कहना है कि वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
देहरादून में चल रहा यह आंदोलन अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सिंग स्टाफ की कमी की बात लगातार सामने आती रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षित अभ्यर्थी नौकरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार जल्द कोई समाधान नहीं निकालती, तो यह आंदोलन राज्यभर में और बड़ा रूप ले सकता है। लगातार बढ़ता जनसमर्थन भी सरकार के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
आंदोलनकारियों की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने साफ शब्दों में कहा है कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि नर्सिंग केवल नौकरी नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम है और सरकार को इस पेशे से जुड़े युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई और वर्षवार नियुक्ति की मांग पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। फिलहाल पूरे उत्तराखंड की नजरें सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हुई हैं।
Watch Video
Watch the full video for more details on this story.











