काशी विद्वत परिषद ने ‘मसान होली’ पर जताई आपत्ति, शास्त्र विरुद्ध बताई परंपरा
वाराणसी- वाराणसी में महाश्मशान घाटों पर मनाई जाने वाली ‘मसान होली’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।काशी विद्वत परिषद ने इस परंपरा पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि श्मशान स्थलों पर इस प्रकार का उत्सव मनाना धर्मशास्त्रों के अनुरूप नहीं है। परिषद का कहना है कि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
गौरतलब है कि रंगभरी एकादशी के बाद वाराणसी में कुछ लोग चिताओं की भस्म और गुलाल के साथ होली खेलने की परंपरा निभाते हैं। यह आयोजन मुख्य रूप से मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर होता है। समर्थकों का मानना है कि यह शिव भक्ति और जीवन-मृत्यु के दार्शनिक संदेश का प्रतीक है।
परिषद से जुड़े विद्वानों का तर्क है कि श्मशान वैराग्य और साधना का स्थल है, न कि सार्वजनिक उत्सव का। उनका कहना है कि इस आयोजन को प्राचीन परंपरा बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि इसके प्रमाण स्पष्ट नहीं हैं। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी आरोप लगाया है कि उत्सव के नाम पर अनुशासनहीनता और नशे की घटनाएं सामने आती हैं।
दूसरी ओर, आयोजन से जुड़े लोगों ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मसान होली स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी परंपरा है। आयोजकों का दावा है कि यह उत्सव आध्यात्मिक भावना से प्रेरित है और इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
फिलहाल इस मुद्दे पर शहर में मतभेद की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है, जबकि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।
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