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उत्तराखंड में LPG संकट: 66% कोटे के साथ व्यावसायिक सिलेंडर वितरण की नई गाइडलाइन लागू

LPG सप्लाई संकट: उत्तराखंड में 66% कोटे के साथ व्यावसायिक सिलेंडर वितरण की नई व्यवस्था लागू

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। खासतौर पर एलपीजी (LPG) की आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य शासन ने व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के वितरण के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (Revised SOP) लागू कर दी है, जिसके तहत अब कुल 66 प्रतिशत कोटे के आधार पर गैस की आपूर्ति की जाएगी।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण गैस सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और कई राज्यों में व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी की उपलब्धता चुनौती बनती जा रही है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार को केंद्र से मिले निर्देशों और पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते एलपीजी की आपूर्ति बाधित हो रही है। ऐसे में राज्यों को सीमित संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया है।

इसी के तहत उत्तराखंड को अतिरिक्त 6 प्रतिशत कोटा दिया गया है, जिससे राज्य का कुल आवंटन अब 66 प्रतिशत हो गया है। इस बढ़े हुए कोटे का उद्देश्य आवश्यक सेवाओं और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों को प्राथमिकता देना है।

किस सेक्टर को कितना गैस मिलेगा?

नई गाइडलाइन के अनुसार, राज्य सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी सिलेंडरों का प्रतिशत तय किया है:

  • होटल और रिजॉर्ट: 24% (करीब 1500 सिलेंडर)
  • रेस्टोरेंट और ढाबे: 32% (करीब 2000 सिलेंडर)
  • औद्योगिक इकाइयां: 20% (करीब 1250 सिलेंडर)
  • विवाह समारोह: 10% (करीब 660 सिलेंडर)
  • सरकारी गेस्ट हाउस: 5% (करीब 300 सिलेंडर)
  • डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और छात्र आवास: प्रत्येक को 3%

इस वितरण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों और सीमित संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो सके।

शादी-ब्याह के लिए विशेष प्रावधान

शादी के सीजन को देखते हुए सरकार ने विशेष राहत भी दी है। विवाह समारोहों के लिए अधिकतम दो व्यावसायिक सिलेंडर दिए जाएंगे। इसके लिए आयोजकों को जिला प्रशासन के पास आवेदन करना होगा और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।

सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही गैस वितरक द्वारा अस्थायी कनेक्शन जारी किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गैस का दुरुपयोग न हो और वास्तविक जरूरतमंदों को ही लाभ मिले।

जिलावार वितरण पर भी ध्यान

राज्य सरकार ने गैस वितरण में जिलों की मांग को भी प्राथमिकता दी है। सामान्य कोटे में देहरादून को सबसे अधिक 31 प्रतिशत आवंटन मिला है, जबकि नैनीताल और हरिद्वार को 13-13 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है।

औद्योगिक कोटे में देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है, जहां प्रत्येक जिले को 380-380 सिलेंडर आवंटित किए गए हैं। यह निर्णय इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

किन कंपनियों पर लागू होगी व्यवस्था?

यह नई व्यवस्था राज्य में काम कर रही तीन प्रमुख तेल कंपनियों पर लागू होगी। इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी के आधार पर ही सिलेंडरों का वितरण किया जाएगा। साथ ही, आपूर्ति की निगरानी के लिए जिला प्रशासन और तेल कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

आम जनता पर क्या होगा असर?

यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह नई गाइडलाइन केवल व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों पर लागू होती है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, बाजार में गैस की कुल उपलब्धता पर दबाव बढ़ने से अप्रत्यक्ष रूप से कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार का यह कदम एक संतुलित व्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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