वेब स्टोरी

टिहरी में भालू का हमला: ग्राम प्रधान समेत 3 घायल, AIIMS ऋषिकेश में भर्ती

टिहरी में भालू का हमला: ग्राम प्रधान समेत तीन लोग घायल, एम्स ऋषिकेश में इलाज जारी

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। ताजा मामला टिहरी गढ़वाल जिले के थौलधार ब्लॉक से सामने आया है, जहां सुल्याधार के नीचे स्थित थापली तोक में एक भालू ने ग्राम प्रधान, वन दरोगा और एक अन्य ग्रामीण पर हमला कर दिया। इस घटना में तीनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह रावत, वन दरोगा अजयपाल पंवार और ग्रामीण विनोद सिंह रावत भालू की गतिविधियों की जानकारी लेने के लिए जंगल की ओर गए थे। हाल ही में इस क्षेत्र में भालू के देखे जाने की कई घटनाएं सामने आई थीं, जिससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई थी। इसी के चलते ये लोग स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे थे।

बताया जा रहा है कि जब तीनों व्यक्ति जंगल में पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद एक भालू ने अचानक उन पर हमला कर दिया। भालू के हमले से तीनों संभल भी नहीं पाए और देखते ही देखते स्थिति गंभीर हो गई। हालांकि, इन तीनों ने हिम्मत नहीं हारी और भालू का डटकर सामना किया। काफी देर तक संघर्ष करने के बाद वे भालू को वहां से भगाने में सफल रहे।

इस संघर्ष के दौरान भालू ने अपने तेज नाखूनों से तीनों के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म कर दिए। हमले में घायल हुए तीनों व्यक्ति दर्द से कराहते रहे, लेकिन उनकी बहादुरी के चलते एक बड़ा हादसा टल गया। यदि वे हिम्मत नहीं दिखाते, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायलों की मदद की। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण वहां तक वाहन पहुंचाना आसान नहीं था, इसलिए ग्रामीणों ने कंडी और कंधों के सहारे घायलों को सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया और अंततः एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।

गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले भी इसी सुल्याधार क्षेत्र में एक महिला पर भालू ने हमला कर दिया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उस महिला का भी इलाज एम्स ऋषिकेश में ही चल रहा है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया है और लोग जंगल की ओर जाने से डरने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में भालुओं की संख्या बढ़ गई है या फिर वे भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर आ रहे हैं। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि इस समस्या का जल्द समाधान निकाला जाए और इलाके में गश्त बढ़ाई जाए।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। साथ ही, लोगों को सतर्क रहने और अकेले जंगल की ओर न जाने की सलाह दी जा रही है। विभाग द्वारा भालू की गतिविधियों को ट्रैक करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में मानवीय दखल और प्राकृतिक आवास में बदलाव के कारण वन्यजीवों का व्यवहार प्रभावित हो रहा है। यही कारण है कि वे अब रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ मानव सुरक्षा के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं।

फिलहाल, तीनों घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस तरह के खतरों का सामना करते रहेंगे। सरकार और वन विभाग को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

Watch Video

Watch the full video for more details on this story.

You Might Also Like

Facebook Feed