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AAP में अंदरूनी कलह? राघव चड्ढा को पद से हटाने पर उठे सवाल

AAP vs Raghav Chadha: क्या आम आदमी पार्टी में सब कुछ ठीक है या शुरू हो गया है अंदरूनी संघर्ष?

आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके प्रमुख युवा चेहरों में से एक राघव चड्ढा के बीच कथित तनाव अब खुलकर सामने आता नजर आ रहा है। हाल ही में पार्टी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्यसभा में उपनेता पद से राघव चड्ढा को हटा दिया और उनकी जगह डॉ. अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त कर दिया। इस निर्णय ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है बल्कि पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

AAP द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह दावा सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। राघव चड्ढा लंबे समय से पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं और उन्हें अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता रहा है। ऐसे में अचानक लिया गया यह फैसला कई सवाल खड़े करता है।

राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर

राघव चड्ढा ने अपनी राजनीतिक यात्रा AAP के साथ ही शुरू की थी। साल 2015 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने 2019 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

2020 में उन्होंने दिल्ली की राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ दिखाई। बाद में उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया, जहां उन्होंने पार्टी के संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 21 मार्च 2022 को उन्हें पंजाब से राज्यसभा के लिए नामित किया गया और वे राज्यसभा के सबसे युवा सदस्यों में से एक बने।

कब और कैसे शुरू हुई दूरियां?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच दूरी की चर्चा तब तेज हुई जब केजरीवाल जेल में थे और उसी दौरान राघव चड्ढा अपनी पत्नी परिणीति चोपड़ा के साथ लंदन में छुट्टियां मनाते नजर आए।

सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों के वायरल होने के बाद पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह सवाल उठने लगे। इसके अलावा, लोकसभा चुनाव के दौरान भी राघव चड्ढा को अपेक्षाकृत सीमित भूमिका में देखा गया, जिससे अटकलों को और बल मिला।

पार्टी का क्या कहना है?

AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता डॉ. अशोक मित्तल ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए इसे एक सामान्य संगठनात्मक बदलाव बताया है। उनके अनुसार, पार्टी समय-समय पर जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण करती रहती है ताकि अन्य नेताओं को भी मौका मिल सके। पार्टी का कहना है कि इस फैसले को किसी तरह के मतभेद से जोड़कर देखना गलत है।

राघव चड्ढा का इशारों में जवाब

राघव चड्ढा ने इस पूरे विवाद पर सीधे तौर पर कोई बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा: "मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।" उनका यह बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे पार्टी के फैसले पर अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

सियासी मायने क्या हैं?

इस पूरे घटनाक्रम को दो नजरियों से देखा जा रहा है:

1. संगठनात्मक बदलाव

पार्टी के अनुसार यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें नए चेहरों को मौका दिया जा रहा है।

2. अंदरूनी मतभेद

विपक्ष और कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पार्टी के अंदर बढ़ते मतभेदों का संकेत हो सकता है।

क्या पड़ेगा पार्टी की छवि पर असर?

अगर यह विवाद आगे बढ़ता है, तो इसका असर AAP की छवि और आंतरिक संतुलन दोनों पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राघव चड्ढा जैसे युवा और लोकप्रिय नेता का किनारे होना पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि यह मामला यहीं शांत हो जाएगा या आने वाले समय में कोई बड़ा राजनीतिक मोड़ लेगा। लेकिन इतना जरूर है कि AAP और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी ने भारतीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

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