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उत्तराखंड के युवाओं के लिए खुलेंगे जर्मनी के द्वार! सरकारी विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे जर्मन भाषा कोर्स और ग्लोबल जॉइंट डिग्री प्रोग्राम

उत्तराखंड के उच्च और तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक मोड़ आया है। उत्तराखंड सरकार और जर्मनी के ब्रांडेनबर्ग राज्य के बीच हुए संयुक्त घोषणा-पत्र (JDI) को धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड सचिवालय में पहली हाई-लेवल हितधारक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता तकनीकी शिक्षा प्रमुख सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा (IAS) ने की।

इस अंतरराष्ट्रीय बड़ी साझेदारी को लागू करने की कमान वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (VMSBUTU) और जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम को सौंपी गई है, जबकि देश का प्रतिष्ठित संस्थान IIT रुड़की इसमें मुख्य ज्ञान साझेदार (Knowledge Partner) की भूमिका निभा रहा है।

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 इस साझेदारी के 3 मुख्य स्तंभ:

उत्तराखंड के छात्रों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए तीन प्रमुख एजेंडों पर मुहर लगी है:

  • ग्लोबल एक्सचेंज प्रोग्राम: उत्तराखंड और जर्मनी के छात्र व शिक्षक एक-दूसरे के संस्थानों में जाकर अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करेंगे।
  • जॉइंट और ड्यूल डिग्री: छात्र अब ऐसी डिग्रियां हासिल कर सकेंगे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधे मान्यता प्राप्त होगी।
  • संयुक्त अनुसंधान (Joint Research): दोनों देशों के विशेषज्ञ मिलकर आधुनिक विषयों पर शोध करेंगे।

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जर्मन भाषा कोर्स और रोजगार पर विशेष फोकस : 

बैठक में सबसे बड़ा फैसला उत्तराखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में जर्मन भाषा पाठ्यक्रम (German Language Courses) शुरू करने का लिया गया है। इससे यहाँ के युवाओं की ग्लोबल कॉर्पोरेट जगत में रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ेगी। साथ ही, जर्मन तकनीक के सहयोग से स्थानीय स्टार्ट-अप्स और MSME को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

 इन विश्वविद्यालयों और आधुनिक क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ:

इस सहयोग के दायरे में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय और श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। जर्मन विशेषज्ञों के साथ मिलकर यहाँ के छात्र निम्नलिखित उभरते क्षेत्रों में पढ़ाई और रिसर्च करेंगे:

  1. पर्यावरण और सुरक्षा: स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु अध्ययन, हिमालयी लचीलापन और आपदा प्रबंधन।
  2. फ्यूचर टेक: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा साइंस और डिजिटल टेक्नोलॉजी।
  3. करियर ओरिएंटेड: डिजिटल एग्रीकल्चर, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी और लाइफ साइंसेज।

 आगे की राह: बनेगी स्पेशल टास्क फोर्स

प्रमुख सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक समझौते को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखकर तुरंत धरातल पर उतारा जाएगा। इसके लिए एक फोकस्ड टास्क फोर्स (Focused Task Force) का गठन किया जा रहा है, जो अंतर-विभागीय समन्वय बनाकर बहुत जल्द छात्र और शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों की शुरुआत करेगी।

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