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धर्मपुर विधानसभा 2027: भाजपा के 'गढ़' में वैभव वालिया की एंट्री, विनोद चमोली के सामने युवा चुनौती

उत्तराखंड में 2027 चुनाव की हलचल तेज हो गई है.इसी बीच देहरादून की सबसे बड़ी विधानसभा सीट धर्मपुर का राजनैतिक गणित चर्चाओं में है,एक तरफ भाजपा के विनोद चमोली दो बार के विधायक रह चुके हैं तो वहीं कई युवा चेहरे बदलाव का मन बना चुके हैं.धर्मपुर विधानसभा राज्य की सियासत का वो आईना है, जहाँ का मिजाज यह तय करता है कि दून की वादियों में राजनीतिक हवा किस तरफ बह रही है। साल 2008 के परिसीमन के बाद वजूद में आई यह सीट संख्याबल के हिसाब से देहरादून जिले की सबसे भारी सीट है। अजबपुर, डिफेन्स कॉलोनी, कारगी, बंजारावाला और क्लेमेंट टाउन जैसे प्रमुख शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों को समेटे इस विधानसभा का इतिहास केवल चुनावी आंकड़ों का नहीं, बल्कि गढ़वाल से आकर बसे लोगों और स्थानीय समुदायों की आकांक्षाओं का लेखा-जोखा है। 

अब तक 3 बार ही हुए धर्मपुर में चुनाव  : 

साल 2012 में जब धर्मपुर सीट पर पहली बार ईवीएम (EVM) के बटन दबे, तो मुकाबला बेहद कड़ा था। कांग्रेस के कद्दावर नेता दिनेश अग्रवाल ने तब भाजपा के किलों को ढहाते हुए करीब 9,420 वोटों से जीत दर्ज की और धर्मपुर के पहले विधायक बने। उस समय इसे कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाने लगा था, क्योंकि शहरी और ग्रामीण मिक्स आबादी वाले इस क्षेत्र में दिनेश अग्रवाल की मजबूत पकड़ थी।

2017 और 2022: 'मेयर' की एंट्री और भाजपा की डबल हैट्रिक : 

धर्मपुर की सियासी कहानी में बड़ा मोड़ साल 2017 में आया। भाजपा ने दून के पूर्व नगर निगम मेयर विनोद चमोली को मैदान में उतारा। निकाय राजनीति के माहिर खिलाड़ी चमोली ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्री दिनेश अग्रवाल को पटखनी देकर यह सीट पहली बार कमल के नाम कर दी।

एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) और कड़े मुकाबले की अटकलों के बीच, पिछले 2022 के विधानसभा चुनाव में विनोद चमोली ने एक बार फिर साबित किया कि धर्मपुर की जनता का भरोसा उन पर कायम है। चमोली ने कांग्रेस के दिनेश अग्रवाल को 10,090 वोटों के अंतर से हराकर लगातार दूसरी बार विधानसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

2027 में क्या बन रहे हैं समीकरण :

लगातार दो बार से भाजपा के कब्जे की सीट पर इस बार कांग्रेस की पैनी नजर है वर्तमान में राष्ट्रीय कांग्रेस के संचार सचिव और लोकसभा चुनाव में वॉर रूम जैसे प्रमुख पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके वैभव वालिया धर्मपुर की सीट पर अपनी दावेदारी मजबूती से कर रहे हैं।वैभव के पास छात्रसंघ चुनावों से लेकर राजीव गाँधी फाउंडेशन जैसे प्रमुख संस्थान में नेशनल हेड का अनुभव है।उत्तराखंड कांग्रेस में वैभव वालिया की गिनती कांग्रेस के उन चुनिंदा युवा नेताओं में होती है जिनकी सीधी पकड़ केंद्रीय नेतृत्व तक है:

क्यों मजबूत दावेदार हैं वैभव वालिया :

वैभव वालिया के पास राजनीति का राष्ट्रीय अनुभव है लोकसभा जैसे बड़े चुनाव को उन्होंने करीब से देखा है और राहुल गांधी की देशव्यापी 'भारत जोड़ो यात्रा' में भारत यात्री के रूप में पूरे देश की समस्याओं को जानते हैं. धर्मपुर विधानसभा में वैभव ने युवाओं और महिलाओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बना ली है.एक युवा चेहरे के रूप में धर्मपुर की जनता सुनहरे भविष्य की आस लगाए बैठी है।

'टूटी सड़कों का विधायक' कैंपेन:

वैभव ने अपनी विधानसभा के जमीनी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, उन्होंने स्थानीय मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है।वे धर्मपुर के वर्तमान भाजपा विधायक विनोद चमोली को "टूटी सड़कों वाला विधायक" कहकर घेर रहे हैं और क्षेत्र में बदहाल सड़कों, जलभराव और सीवरेज की समस्या को बड़ा मुद्दा बना रहे हैं।

मॉडल विधानसभा का विजन: 

उनका दावा है कि यदि उन्हें मौका मिलता है, तो वे धर्मपुर को उत्तराखंड की एक"मॉडल विधानसभा" के रूप में विकसित करेंगे, जिसके विकास कार्यों की चर्चा पूरे राज्य की सभी 70 सीटों पर होगी।

ग्राउंड कनेक्टिविटी:

वह धर्मपुर विधानसभा के विभिन्न वार्डों और बस्तियों (जैसे टर्नर रोड, देहरखास, कारगी आदि) में लगातार जनसभाएं, महिलाओं के लिए सामाजिक कार्यक्रम (जैसे त्योहारों पर मेहंदी कैंप) और जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं.वैभव वालिया एक पढ़े-लिखे, आधुनिक सोच वाले और आक्रामक रणनीतिकार युवा नेता हैं, जो केंद्रीय संगठन के अपने अनुभव के दम पर धर्मपुर में भाजपा के इस मजबूत गढ़ को भेदने की तैयारी कर रहे हैं।

वैभव वालिया ने सभी देशवासियों को शुभकामना सन्देश भेजा है। 
 

 

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