आसाराम को हाईकोर्ट से फिर राहत: मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत 25 मई 2026 तक बढ़ी
आसाराम को हाईकोर्ट से फिर राहत, मेडिकल आधार पर बढ़ी अंतरिम जमानत
यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु Asaram Bapu को एक बार फिर राहत मिली है। Rajasthan High Court की जोधपुर बेंच ने उनकी अंतरिम जमानत को मेडिकल आधार पर 25 मई 2026 तक या उनकी अपील पर अंतिम निर्णय आने तक बढ़ाने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है।
खंडपीठ ने सुनाया अहम फैसला
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश Sanjeev Prakash Sharma और न्यायाधीश Sangeeta Sharma की खंडपीठ द्वारा सुनाया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पूर्व में दी गई शर्तों को ज्यादातर यथावत रखा है, लेकिन कुछ मामलों में सीमित राहत भी दी गई है।
बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य आधार पर रखी दलील
आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Devadatt Kamat और अधिवक्ता Yashpal Singh Rajpurohit ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आसाराम वर्ष 2013 से जेल में बंद हैं और 2018 में दुष्कर्म मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि उनकी उम्र अधिक हो चुकी है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिसके चलते उनका लगातार इलाज जरूरी है।
इलाज जारी रखने की आवश्यकता पर जोर
वकीलों ने कहा कि वर्तमान में आसाराम 29 अक्टूबर 2025 से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इलाज करा रहे हैं। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि यदि जमानत अवधि नहीं बढ़ाई जाती है, तो उनका इलाज बाधित हो सकता है।
इस आधार पर अदालत से अनुरोध किया गया कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जमानत को आगे बढ़ाया जाए।
जमानत नहीं बढ़ने पर उपचार रुकने की आशंका
बचाव पक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उन्हें दोबारा जेल में सरेंडर करना पड़ा, तो चल रहा इलाज प्रभावित होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सजा के खिलाफ दायर अपील पर 20 अप्रैल 2026 को सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
राज्य सरकार ने रखा अपना पक्ष
वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता Deepak Choudhary ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रही हैं।सरकार का कहना था कि इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखी गई है और सभी आवश्यक सुविधाएं जेल के भीतर ही प्रदान की जाती हैं।
शर्तों के साथ दी गई राहत
अदालत ने जमानत बढ़ाते समय Supreme Court of India द्वारा पूर्व में तय की गई अधिकांश शर्तों को यथावत रखा है। हालांकि, तीन कांस्टेबल की निगरानी से संबंधित शर्त में आंशिक ढील दी गई है।
इसके अलावा अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जमानत अवधि के दौरान आसाराम केवल अपने इलाज के उद्देश्य से ही बाहर रहेंगे।
धार्मिक गतिविधियों पर सख्त रोक
कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस अवधि में उन्हें किसी भी धार्मिक सभा में भाग लेने, भीड़ एकत्रित करने या सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही उन्हें देश छोड़ने की भी इजाजत नहीं दी गई है।
यह निर्देश इसलिए दिए गए हैं ताकि कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके और किसी भी प्रकार की सामाजिक या सार्वजनिक अव्यवस्था से बचा जा सके।
मामले पर बनी हुई है नजर
यह मामला पहले से ही काफी संवेदनशील रहा है और देशभर में इसकी व्यापक चर्चा होती रही है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सभी की नजर अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है, जो आसाराम की अपील पर सुनाया जाएगा। आसाराम को मिली यह राहत अस्थायी है और पूरी तरह मेडिकल आधार पर दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत के दौरान किसी भी प्रकार की शर्तों का उल्लंघन होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आने वाले समय में अदालत का अंतिम फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।
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