बीएसएफ जवानों ने फतह की दुनिया की चौथी सबसे ऊंची चोटी माउंट ल्होत्से, पौड़ी के विकास सिंह रावत ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान
बीएसएफ जवानों ने फतह की दुनिया की चौथी सबसे ऊंची चोटी माउंट ल्होत्से, पौड़ी के विकास सिंह रावत ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान
बीएसएफ की बड़ी उपलब्धि, माउंट ल्होत्से पर लहराया तिरंगा
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने एक बार फिर दुनिया के सबसे कठिन पर्वत अभियानों में सफलता हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया है। बीएसएफ की ऑल मेन पर्वतारोहण टीम ने विश्व की चौथी सबसे ऊंची चोटी माउंट ल्होत्से (8516 मीटर) पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया। इस ऐतिहासिक अभियान में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कंडेरी गांव निवासी विकास सिंह रावत भी शामिल रहे, जिन्होंने अपनी उपलब्धि से पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है।
उत्तराखंड के विकास सिंह रावत ने बढ़ाया प्रदेश का गौरव
पौड़ी गढ़वाल के कंडेरी गांव निवासी विकास सिंह रावत हिमालय की कठिन चोटियों को फतह करने के लिए जाने जाते हैं। वह वर्तमान में बीएसएफ में कार्यरत हैं और इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोहण अभियानों में हिस्सा ले चुके हैं।
विकास सिंह रावत इससे पहले दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर) और दुनिया की छठी सबसे ऊंची चोटी माउंट मनासलू (8163 मीटर) का सफल आरोहण कर चुके हैं। अब उन्होंने नेपाल स्थित माउंट ल्होत्से और माउंट लोबुचे को फतह कर अपनी उपलब्धियों में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है।
हीरक जयंती वर्ष पर आयोजित किया गया विशेष अभियान
बीएसएफ द्वारा इस वर्ष हीरक जयंती वर्ष के अवसर पर ऑल पुरुष पर्वतारोहण अभियान का आयोजन किया गया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य माउंट एवरेस्ट और माउंट ल्होत्से पर तिरंगा तथा बीएसएफ ध्वज फहराना था।
इसके साथ ही अभियान के जरिए “क्लीन हिमालय, ग्लेशियर बचाओ” और “हम फिट तो इंडिया फिट” जैसे महत्वपूर्ण संदेशों को भी लोगों तक पहुंचाना था। इस अभियान को बीएसएफ महानिदेशक प्रवीण कुमार ने 6 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
पद्मश्री लवराज सिंह के नेतृत्व में मिली सफलता
माउंट ल्होत्से अभियान का नेतृत्व प्रसिद्ध पर्वतारोही पद्मश्री लवराज सिंह ने किया। कठिन मौसम, बर्फीले तूफान और ऑक्सीजन की कमी जैसी चुनौतियों के बावजूद टीम ने 23 मई 2026 को दुनिया की चौथी सबसे ऊंची चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा और बीएसएफ का ध्वज फहराया। इस उपलब्धि को भारतीय पर्वतारोहण इतिहास में बड़ी सफलता माना जा रहा है। बीएसएफ की टीम ने यह साबित किया कि भारतीय जवान किसी भी कठिन चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।
माउंट ल्होत्से क्यों है खास?
माउंट ल्होत्से नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित है और इसे दुनिया की चौथी सबसे ऊंची पर्वत चोटी माना जाता है। इसकी ऊंचाई 8516 मीटर है। यह पर्वत एवरेस्ट के बेहद करीब स्थित होने के बावजूद अत्यंत कठिन और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पर्वतारोहियों के अनुसार ल्होत्से की चढ़ाई में खड़ी बर्फीली दीवारें, तेज हवाएं और ऑक्सीजन की कमी सबसे बड़ी चुनौती होती हैं। यही वजह है कि इस चोटी को फतह करना किसी भी पर्वतारोही के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
गांव में खुशी की लहर
विकास सिंह रावत की सफलता के बाद उनके गांव कंडेरी समेत पूरे पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों और परिजनों ने इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास की मेहनत और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा है। परिवार वालों ने कहा कि बचपन से ही विकास को पहाड़ों और रोमांच से विशेष लगाव था। कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास कभी कम नहीं हुआ और आज उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सफलता
विकास सिंह रावत की यह उपलब्धि उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है। पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं में पर्वतारोहण और सेना के प्रति पहले से ही विशेष आकर्षण रहा है। ऐसे में विकास की सफलता नई पीढ़ी को देश सेवा और साहसिक खेलों के लिए प्रेरित करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में एडवेंचर स्पोर्ट्स और पर्वतारोहण को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार और पहचान के नए अवसर भी तैयार किए जा सकते हैं।
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