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उत्तराखंड के पिनाऊ गांव में हार्ट अटैक मरीज को ग्रामीणों ने 8 किमी स्ट्रेचर पर पहुंचाया, फिर हेली एंबुलेंस से देहरादून रेफर

सड़क नहीं तो जिंदगी भी मुश्किल: पिनाऊ गांव में हार्ट अटैक मरीज को ग्रामीणों ने 8 किमी स्ट्रेचर पर पहुंचाया, फिर हेली एंबुलेंस से बची जान

चमोली के सुदूर गांव में दिखी ग्रामीणों की मानवता और संघर्ष

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसका ताजा उदाहरण चमोली जिले के देवाल विकासखंड के सुदूर गांव पिनाऊ में देखने को मिला, जहां एक 72 वर्षीय बुजुर्ग को हार्ट अटैक आने के बाद ग्रामीणों ने आठ किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ढोकर सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद मरीज को प्राथमिक उपचार देकर हेली एंबुलेंस की मदद से देहरादून के हायर सेंटर भेजा गया।

यह घटना एक बार फिर पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाती है। ग्रामीणों की तत्परता और सामूहिक प्रयास से बुजुर्ग की जान बचाई जा सकी।

रात में बिगड़ी तबीयत, सुबह शुरू हुआ जीवन बचाने का संघर्ष

जानकारी के अनुसार चमोली जनपद के कुमाऊं सीमा से सटे पिनाऊ गांव निवासी 72 वर्षीय केशर सिंह पुत्र आलम सिंह की गुरुवार रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने जब उनकी हालत गंभीर देखी तो तुरंत गांव में मदद जुटाई गई।

शुक्रवार सुबह करीब सात बजे ग्रामीणों ने बुजुर्ग को स्ट्रेचर में बांधा और अस्पताल तक पहुंचाने के लिए कठिन सफर शुरू किया। गांव से सड़क तक पहुंचने के लिए करीब आठ किलोमीटर का दुर्गम पैदल रास्ता तय करना पड़ा।

तीन घंटे तक लगातार पहाड़ी पगडंडियों, खतरनाक गदेरों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए ग्रामीण मरीज को बारी-बारी से उठाकर चलते रहे। आखिरकार मरीज को घेस मोटर मार्ग तक पहुंचाया गया, जहां से निजी वाहन की सहायता से देवाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

डॉक्टरों ने बताया हार्ट अटैक, हालत गंभीर होने पर किया रेफर

देवाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों ने बुजुर्ग की जांच की। चिकित्साधिकारी डॉ. रोबिन राज ने बताया कि मरीज को हार्ट अटैक आया था और उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी।

प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने मरीज को तुरंत हायर सेंटर रेफर करने की सलाह दी। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने जिला प्रशासन से हेली एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने की मांग की।

गौचर से हेली एंबुलेंस के जरिए देहरादून पहुंचाया गया मरीज

मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए गौचर हवाई पट्टी पर हेली एंबुलेंस की व्यवस्था की। इसके बाद मरीज को एंबुलेंस के माध्यम से गौचर पहुंचाया गया।

उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग के सीएमएस बीपी पुरोहित ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को सुरक्षित गौचर हवाई पट्टी तक पहुंचाया गया, जहां से हेली सेवा के जरिए देहरादून के हायर सेंटर में भर्ती कराया गया।

ग्रामीणों और परिजनों ने समय पर मिली हेली सेवा के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का आभार जताया।

सड़क न होने से ग्रामीणों की बढ़ रही परेशानियां

पिनाऊ गांव के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा न होने के कारण गांव में बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों को आज भी पगडंडियों और गदेरों को पार कर घंटों पैदल चलना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह रास्ते और अधिक खतरनाक हो जाते हैं। कई बार मरीजों की हालत रास्ते में ही गंभीर हो जाती है।

पूर्व प्रधान उमराव सिंह दानू ने बताया कि गांव तक सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

कई बार हुआ सर्वे, फिर भी सड़क को नहीं मिली मंजूरी

ग्रामीणों के अनुसार धूराधारकोट से पिनाऊ तक 22 किलोमीटर मोटर सड़क निर्माण के लिए कई बार सर्वे हो चुका है। इसके बावजूद सड़क निर्माण को अभी तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

पूर्व प्रधान उमराव सिंह दानू ने कहा कि सड़क न होने के कारण गांव के लोगों को हर आपात स्थिति में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को स्ट्रेचर पर अस्पताल पहुंचाना आम बात बन चुकी है।

उन्होंने सरकार से जल्द सड़क निर्माण को मंजूरी देने और कार्य शुरू करने की मांग की है।

वन विभाग की अनुमति के कारण अटकी प्रक्रिया

थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने बताया कि धूराधारकोट से पिनाऊ तक प्रस्तावित 22 किलोमीटर सड़क का सर्वे पूरा हो चुका है। वर्तमान में सड़क की फाइल फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए नोडल अधिकारी के पास लंबित है। उन्होंने कहा कि वन भूमि से जुड़ी पत्रावलियों का जल्द निस्तारण होने की उम्मीद है और सड़क निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है।

पहाड़ में आज भी चुनौती बनी है स्वास्थ्य और सड़क सुविधा

उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव बड़ी समस्या बना हुआ है। पिनाऊ गांव की यह घटना बताती है कि आधुनिक दौर में भी कई गांव ऐसे हैं, जहां लोगों को मरीजों को कंधों और स्ट्रेचर के सहारे अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है।

हालांकि ग्रामीणों की एकजुटता और मानवता ने इस बार एक जिंदगी बचा ली, लेकिन यह घटना सरकार और प्रशासन के लिए भी एक बड़ा सवाल छोड़ती है कि आखिर कब तक पहाड़ के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

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