पौड़ी गढ़वाल में स्कूल के पास पहुंचे दो गुलदार, बच्चों में दहशत; 11 और 12 मई को स्कूल बंद
पौड़ी गढ़वाल में स्कूल के पास पहुंचे दो गुलदार, बच्चों में मची दहशत; सुरक्षा के चलते दो दिन का अवकाश घोषित
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में गुलदारों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला पौड़ी गढ़वाल जिले के एकेश्वर विकासखंड से सामने आया है, जहां राजकीय प्राथमिक विद्यालय सासौं में शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब स्कूल परिसर के पास दो गुलदार दिखाई दिए। घटना के समय स्कूल में प्रार्थना सभा चल रही थी और बड़ी संख्या में छोटे बच्चे मैदान में मौजूद थे। गुलदारों को देखते ही बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों में दहशत फैल गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने 11 और 12 मई को स्कूल में अवकाश घोषित कर दिया है।
प्रार्थना सभा के दौरान दिखे दो गुलदार
जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह स्कूल में नियमित प्रार्थना सभा चल रही थी। इसी दौरान गांव के टैक्सी चालक शुभम रावत की नजर स्कूल भवन के पास घूम रहे दो गुलदारों पर पड़ी। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्कूल प्रशासन और आसपास के ग्रामीणों को दी। जैसे ही गुलदारों के स्कूल के पास होने की खबर फैली, वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्कूल में मौजूद शिक्षकों ने बिना देर किए बच्चों को सुरक्षित कमरों में पहुंचाया। छोटे बच्चों में डर का माहौल बन गया था और कई बच्चे रोने लगे। ग्रामीण भी बड़ी संख्या में स्कूल परिसर में पहुंच गए। लोगों ने शोर मचाना शुरू किया और वाहन चालकों ने लगातार हार्न बजाए, जिसके बाद दोनों गुलदार जंगल की ओर भाग गए।
शिक्षकों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
विद्यालय के सहायक अध्यापक विकास चंद्र कंथोला ने बताया कि स्कूल में प्राथमिक कक्षाओं के छोटे बच्चे पढ़ते हैं और गुलदारों की मौजूदगी उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते गुलदारों को नहीं देखा जाता तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
शिक्षकों की तत्परता और ग्रामीणों की मदद से बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। घटना के बाद अभिभावकों में भी भारी चिंता देखने को मिली। कई अभिभावक तुरंत स्कूल पहुंच गए और बच्चों को अपने साथ घर ले गए।
दो दिन के लिए स्कूल बंद
घटना के बाद प्रभारी उप शिक्षा अधिकारी मनोज जोशी ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 11 और 12 मई को स्कूल में अवकाश घोषित कर दिया। शिक्षा विभाग ने आसपास के अन्य स्कूलों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक बच्चों की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतें। स्कूल प्रशासन ने भी ग्रामीणों से स्कूल के आसपास निगरानी बनाए रखने का अनुरोध किया है।
क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा गुलदारों का आतंक
पौड़ी गढ़वाल और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से गुलदारों की गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। जंगलों से निकलकर गुलदार अब गांवों और आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने लगे हैं। इससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि वन्यजीवों के बढ़ते खतरे के कारण कई परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कई स्कूलों में छात्र संख्या लगातार घट रही है क्योंकि अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कुछ स्कूल तो बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग से की कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और गुलदारों को पकड़ने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद वन विभाग की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जाती। स्थानीय लोगों ने स्कूलों और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास पिंजरे लगाने और नियमित निगरानी की मांग की है।
उत्तराखंड में बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। जंगलों का दायरा कम होने और भोजन की तलाश में जंगली जानवर अब गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाने की जरूरत है। साथ ही ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और बच्चों को अकेले बाहर न भेजने की सलाह दी जा रही है।
पौड़ी गढ़वाल की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना कितना जरूरी हो गया है।
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