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होर्मुज स्ट्रेट संकट 2026: ईरान-अमेरिका तनाव का भारत की तेल सप्लाई और LPG जहाजों पर असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं। यह स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का सबसे अहम मार्ग माना जाता है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है।

हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर सख्ती बढ़ा दी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुछ जहाजों को वापस लौटने का आदेश दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि, कुछ देशों के जहाजों को विशेष अनुमति देकर सीमित आवाजाही जारी रखी गई है।

भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंता का विषय है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, और होर्मुज स्ट्रेट इस सप्लाई चेन का मुख्य रास्ता है। वर्तमान संकट के बीच भारत के दो व्यापारिक जहाज, जो पेट्रोलियम उत्पाद लेकर आ रहे हैं, इस स्ट्रेट से गुजर रहे हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

इसके अलावा, पांच भारतीय एलपीजी कैरियर जहाज स्ट्रेट के पास लंगर डाले खड़े हैं। इन जहाजों पर लगभग 1.7 लाख टन एलपीजी लदी हुई है, जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ये जहाज एक साथ समूह में आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे का सामना मिलकर किया जा सके।

ईरान की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि वह केवल उन्हीं जहाजों को गुजरने देगा जो उसके विरोधी देशों से जुड़े नहीं हैं। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ईरान पहले ही 26 जहाजों को एक वैकल्पिक मार्ग से गुजरने की अनुमति दे चुका है, जो लारक द्वीप के पास से होकर गुजरता है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही पूरी तरह से बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा, जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो यह वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है। शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने रूट बदलने या देरी करने पर विचार कर रही हैं, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

भारत सरकार और नौसेना स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकते हैं। यह भी संभावना है कि भारत वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों की तलाश तेज कर दे, ताकि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

अंततः, होर्मुज स्ट्रेट संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम करने में कितने सफल होते हैं।

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