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होर्मुज संकट से भारत में LPG संकट: सरकार के बड़े फैसले और नए नियम जानें

पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इस संकट ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब अमेरिका और इस्राइल के हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का परिवहन होता है। इसके बंद होने का असर भारत समेत कई देशों पर सीधे तौर पर पड़ा है।

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस स्थिति से अछूता नहीं रह सका। खासकर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के मामले में देश की निर्भरता खाड़ी देशों पर काफी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है।

भारत सबसे अधिक एलपीजी आयात कतर से करता है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 34 प्रतिशत है। इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत भी प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। इन सभी देशों से आने वाली आपूर्ति का प्रमुख रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य ही है। ऐसे में इसके बंद होने से भारत में एलपीजी संकट की स्थिति पैदा हो गई।

देश में LPG संकट के हालात

जैसे ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ, भारत के कई शहरों में गैस आपूर्ति प्रभावित होने लगी। खासकर वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडरों की सप्लाई में बाधा आने लगी, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय प्रभावित हुए। इसके साथ ही घरेलू गैस सिलिंडरों की कमी की खबरें भी सामने आईं।

स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने तेजी से कई महत्वपूर्ण फैसले लिए और नियमों में बदलाव किया। इन कदमों का उद्देश्य गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जमाखोरी को रोकना था।

सरकार के प्रमुख फैसले और बदलाव

1. कीमतों में बढ़ोतरी (7 मार्च 2026)
सरकार ने घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी की। 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलिंडर की कीमत में 60 रुपये और 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलिंडर में 115 रुपये की वृद्धि की गई। इससे आम जनता और व्यवसायों पर महंगाई का असर पड़ा।

2. एस्मा लागू (7 मार्च 2026)
आवश्यक सेवा प्रबंधन कानून (ESMA) लागू करते हुए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया। साथ ही उत्पादन को घरेलू आपूर्ति के लिए प्राथमिकता देने को कहा गया।

3. बुकिंग समयसीमा में बदलाव (9 मार्च 2026)
एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग के बीच अंतर को बढ़ाकर शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन कर दिया गया, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके।

4. आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू (10 मार्च 2026)
सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया। इसके तहत घरेलू, अस्पताल और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी गई, जबकि उद्योगों की गैस सप्लाई में कटौती की गई।

5. PNG उपयोग को बढ़ावा (14-16 मार्च 2026)
सरकार ने पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने के लिए नए नियम लागू किए। जिन उपभोक्ताओं के पास पहले से PNG कनेक्शन है, उन्हें एलपीजी कनेक्शन रखने से रोका गया। साथ ही शहरों में PNG नेटवर्क विस्तार पर जोर दिया गया।

6. बायोमेट्रिक सत्यापन (15 मार्च 2026)
एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी (बायोमेट्रिक सत्यापन) को जरूरी किया गया, जिससे सही उपभोक्ताओं तक गैस पहुंच सके और कालाबाजारी पर रोक लगे।

7. OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम (20 मार्च 2026)
गैस सिलिंडर डिलीवरी के लिए OTP आधारित ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) लागू किया गया, जिससे फर्जी डिलीवरी और डायवर्जन रोका जा सके।

8. कमर्शियल सप्लाई में राहत (18-21 मार्च 2026)
होटल और रेस्टोरेंट को राहत देने के लिए कमर्शियल एलपीजी आवंटन बढ़ाया गया। राज्यों को अतिरिक्त गैस दी गई ताकि बाजार में संतुलन बना रहे।

9. नया नियम (22 मार्च 2026)
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 12 सिलिंडर से अधिक उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए नई बुकिंग प्रक्रिया लागू की, जिसमें अतिरिक्त जानकारी देना अनिवार्य किया गया।

आगे की चुनौतियां

विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट भारत के लिए एक चेतावनी भी है कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और आत्मनिर्भरता पर और अधिक जोर दिया जाए। सरकार पहले ही एलपीजी से PNG, बायो-सीएनजी और इथेनॉल जैसे विकल्पों की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दी है। हालांकि, सरकार द्वारा उठाए गए त्वरित कदमों से स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इस संकट से कैसे उबरता है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।

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