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एक दिन पहले ही लौटना चाहते थे श्रद्धालु, खराब मौसम ने रोका रास्ता; अगले दिन हादसे में 6 की मौत

Badrinath Helicopter Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ से देहरादून लौट रहा हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि हेलिकॉप्टर में सवार श्रद्धालु एक दिन पहले ही वापस लौटना चाहते थे, लेकिन खराब मौसम के चलते उन्हें बद्रीनाथ में रुकना पड़ा।

बद्रीनाथ से लौटते समय हुआ दर्दनाक हादसा

30 अक्टूबर 2026 को बद्रीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए उड़ान भरने वाला हेलिकॉप्टर चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा हाथी पर्वत के पास चाई गांव के आसपास हुआ।

हेलिकॉप्टर में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें पांच श्रद्धालु और एक पायलट शामिल थे। दुर्घटना में सभी छह लोगों की जान चली गई। हेलिकॉप्टर Trans Bharat Aviation कंपनी का बताया गया है।

एक दिन पहले ही लौटना चाहते थे श्रद्धालु

इस हादसे से जुड़ी सबसे भावुक जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक से आए पांचों श्रद्धालु 29 अक्टूबर को बद्रीनाथ पहुंचे थे। दर्शन करने के बाद उन्होंने माना गांव का भी दौरा किया था।

इसके बाद श्रद्धालुओं ने हेली सेवा के कर्मचारियों से उसी दिन वापस लौटने की इच्छा जताई थी। हालांकि, खराब मौसम और बर्फबारी के कारण उस दिन हेलिकॉप्टर सेवाएं संचालित नहीं हो सकीं। ऐसे में उन्हें बद्रीनाथ में ही रुकना पड़ा।

अगले दिन 30 अक्टूबर को मौसम में कुछ सुधार होने के बाद उनकी वापसी की उड़ान हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया।

कौन थे हादसे में जान गंवाने वाले लोग?

हादसे में जान गंवाने वाले पांचों यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे, जबकि पायलट दिल्ली का निवासी था।

 मृतकों की पहचान इस प्रकार बताई गई है:

  • कैप्टन हिमांशु सभरवाल – पायलट
  • अरुण सालुंके – बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर
  • प्रताप गौड़ा बच्चिहल्ली
  • वीबी शंकर गौड़ा
  • सुधीर के.
  • एचएस नटराज

हादसे वाले दिन मौसम को लेकर जारी था ऑरेंज अलर्ट

इस दुर्घटना के बाद मौसम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 अक्टूबर को चमोली जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था।

मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर गरज-चमक, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई थी। ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी की आशंका भी थी।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मौसम संबंधी चेतावनी के बीच उड़ान को किस आधार पर अनुमति दी गई। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि खराब मौसम ही दुर्घटना की वजह था।

हादसे की वजह पर क्या सामने आया?

हादसे के वास्तविक कारणों का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। शुरुआती रिपोर्टों में खराब मौसम, अचानक बादलों के बीच फंसने और तकनीकी खराबी जैसी संभावनाओं पर चर्चा हुई है।

उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के अधिकारियों ने भी संभावित कारणों की जांच की बात कही है।

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा दुर्घटना की जांच की जानी है। जांच में हेलिकॉप्टर के तकनीकी रिकॉर्ड, मेंटेनेंस, उड़ान से पहले मौसम की स्थिति और पायलट से जुड़े पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

सुरक्षा के मद्देनजर हेलिकॉप्टर सेवाओं पर कार्रवाई

हादसे के बाद एहतियाती कदम उठाते हुए Trans Bharat Aviation के हेलिकॉप्टर बेड़े को ग्राउंड किए जाने की जानकारी सामने आई। वहीं, SDRF, पुलिस, सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान चलाया।

उत्तराखंड की हेली सेवाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण परिवहन साधन हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में केदारनाथ और अन्य क्षेत्रों में हुए हेलिकॉप्टर हादसों ने इन सेवाओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े किए हैं।

बद्रीनाथ हादसे ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की चुनौती को देखते हुए उड़ान सुरक्षा के नियमों का कितनी सख्ती से पालन किया जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल: क्या टल सकता था यह हादसा?

एक दिन पहले लौटने की इच्छा जताने वाले पांच श्रद्धालुओं की अगले दिन हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। यह घटना कई सवाल छोड़ गई है।

क्या उड़ान से पहले मौसम का पर्याप्त आकलन किया गया था? क्या रूट पर दृश्यता सुरक्षित थी? क्या हेलिकॉप्टर में कोई तकनीकी खराबी थी?

इन सभी सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल, इस हादसे ने छह परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है और उत्तराखंड की हेली सेवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है।