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News : सीएम धामी ने स्वयं सहायता समूहों और सफाई कर्मियों से की मुलाकात, पढ़ें!

News : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में गैरसैंण के भराड़ीसैंण में सुबह की सैर के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम करने वाली महिलाओं से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने इन महिलाओं के समर्पण और उनके कामों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ये महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं से सरकारी योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी भी ली और उन्हें आश्वासन दिया कि राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों को और सशक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

News : पर्यटकों के लिए खास अपील

मुख्यमंत्री धामी ने देवभूमि उत्तराखंड आने वाले सभी पर्यटकों से एक खास अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के अनुसार, पर्यटक अपनी यात्रा खर्च का कम से कम 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करें।

इस कदम से उत्तराखंड की ग्रामीण आजीविका और स्थानीय कारीगरों को सीधा फायदा मिलेगा। सीएम धामी ने इस मुलाकात और अपील के बारे में अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर भी पोस्ट किया।

उन्होंने लिखा, "गैरसैंण के भराड़ीसैंण में सुबह की सैर के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम कर रही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से बात करके उनके काम की सराहना की और सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।"

उन्होंने आगे लिखा, "देवभूमि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से मेरी अपील है कि वे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर अपनी यात्रा के खर्च का 5% स्थानीय उत्पादों की खरीद में जरूर लगाएं।"

News : सफाई कर्मियों से मुलाकात

अपनी सुबह की सैर के दौरान, सीएम धामी ने विधानसभा परिसर में काम करने वाले सफाई कर्मियों से भी मुलाकात की। उन्होंने उनके खाने-पीने और रहने की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। सभी सफाई कर्मियों ने सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में लगी बहनों का समर्पण और स्वच्छ व स्वस्थ समाज के लिए काम कर रहे सफाई कर्मियों की लगन, 'विकसित उत्तराखंड' की दिशा में एक सामूहिक प्रयास का बेहतरीन उदाहरण है।

News : स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्व

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में, जहाँ खेती और पारंपरिक व्यवसाय चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, स्वयं सहायता समूह (SHG) एक मजबूत आर्थिक आधार प्रदान करते हैं। ये समूह महिलाओं को छोटे-मोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करते हैं, जैसे कि हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य उत्पादों का निर्माण, और पर्यटन-संबंधी सेवाएं। इन समूहों के जरिए, महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं, बल्कि अपने परिवार और समुदाय के विकास में भी योगदान देती हैं।

स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देना उत्तराखंड के लिए एक बड़ा कदम है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों की कला और कौशल को भी पहचान मिलेगी। जब पर्यटक स्थानीय उत्पादों को खरीदते हैं, तो वे सीधे उन परिवारों की मदद करते हैं जो इन उत्पादों को बनाते हैं। यह एक आत्मनिर्भर भारत और विकसित उत्तराखंड की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

News : पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का तालमेल

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बहुत बड़ा योगदान है। हर साल लाखों पर्यटक यहाँ के पहाड़ों, मंदिरों, और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने आते हैं। अगर ये पर्यटक अपनी यात्रा के खर्च का एक छोटा हिस्सा भी स्थानीय उत्पादों पर खर्च करते हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन की समस्या भी कम होगी।

News : सफाई कर्मियों का योगदान

इस खबर में मुख्यमंत्री धामी ने सफाई कर्मियों के महत्व को भी उजागर किया है। सफाईकर्मी किसी भी समाज की रीढ़ होते हैं। वे शहर, गाँव और सार्वजनिक स्थानों को साफ और स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका काम अक्सर अनदेखा किया जाता है, लेकिन उनके बिना किसी भी राज्य का विकास संभव नहीं है। मुख्यमंत्री ने उनकी रहने और खाने की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी लेकर यह दिखाया कि सरकार उनके कल्याण के प्रति भी कितनी संवेदनशील है।

News : मुख्यमंत्री धामी का समग्र दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह मुलाकात और अपील उनके समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है। उनका मानना है कि 'विकसित उत्तराखंड' का सपना तभी पूरा हो सकता है जब राज्य के सभी लोग, चाहे वे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हों, सफाईकर्मी हों, या आम नागरिक, मिलकर काम करें। वे चाहते हैं कि सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंचें और लोगों को इसका सीधा लाभ मिले। इसी कड़ी में उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से सीधे फीडबैक लिया, ताकि सरकार की योजनाओं में सुधार किया जा सके।

यह पहल दिखाती है कि सरकार न केवल बड़े प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रही है, बल्कि वह छोटे-छोटे स्तर पर काम कर रहे लोगों की भी परवाह करती है। यह एक समावेशी विकास का उदाहरण है, जहाँ हर व्यक्ति को विकास की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।

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