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News : बागेश्वर में भारी मात्रा स्मैक के साथ पंजाब के दो तस्कर गिरफ्तार, पकड़ी गई अब तक की सबसे बड़ी खेप!

News : उत्तराखंड को 'नशामुक्त' बनाने के अभियान के तहत बागेश्वर पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को एक बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई में उन्होंने पंजाब के दो युवाओं को भारी मात्रा में स्मैक के साथ गिरफ्तार किया है।

बरामद की गई 47.24 ग्राम स्मैक की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 15 लाख रुपये आंकी गई है, जिसे इस साल जिले में पकड़ी गई अब तक की सबसे बड़ी खेप माना जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर घोड़के ने एक पत्रकार वार्ता में इस उपलब्धि का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि राज्य को नशा मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, और इसी के तहत पुलिस उपाधीक्षक अजय साह के नेतृत्व में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। रविवार को गिरेछीना-बागेश्वर मोटर मार्ग पर पुलिस टीम द्वारा की जा रही गहन चेकिंग के दौरान दो संदिग्ध युवकों को पकड़ा गया।

News : अंतरराज्यीय तस्करों की गिरफ्तारी

पुलिस ने जब इन युवकों से पूछताछ की, तो उनकी गतिविधियां और हावभाव संदिग्ध लगे। तलाशी लेने पर उनके पास से अवैध स्मैक बरामद हुई। गिरफ्तार किए गए युवकों की पहचान सावनप्रीत सिंह (19), पुत्र कुलदीप सिंह, निवासी नमेरा पनुवा, थाना तरनतारन, जिला तरनतारन, पंजाब और हरगुरजीत सिंह (18), पुत्र बुटा सिंह, निवासी मोहल्ला नुरदी अड्डा तरनतारन, जिला तरनतारन, पंजाब के रूप में हुई है।

सावनप्रीत सिंह के पास से 24.29 ग्राम और हरगुरजीत सिंह के पास से 22.95 ग्राम स्मैक बरामद हुई। दोनों को गिरेछीना-बागेश्वर मोटर मार्ग के द्वारिकाछीना, अमसरकोट के पास से गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ कोतवाली में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस ने उनके आपराधिक इतिहास का पता लगाने के लिए पंजाब पुलिस से भी संपर्क साधा है। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में अल्मोड़ा जेल भेज दिया गया है।

News : इस वर्ष की सबसे बड़ी कामयाबी

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस साल पकड़ी गई यह स्मैक की खेप पिछले साल की तुलना में चार गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है।

हालांकि, इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल को भी जन्म दिया है कि पंजाब से बागेश्वर जैसे दूरदराज के इलाके तक नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले ये तस्कर पहले क्यों नहीं पकड़े जा रहे थे?

स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों के बीच यह भी चर्चा है कि इस तरह के और भी कई अंतरराज्यीय तस्कर लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय हो सकते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि ये तस्कर राजनीतिक दलों के साथ अपने संबंधों का लाभ उठाते हैं और कपड़े या अन्य व्यवसाय की आड़ में नशीले पदार्थों की तस्करी करते हैं। कुछ लोगों के अनुसार, पकड़े गए युवक यहां से चरस की खेप ले जाने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता के कारण वे समय रहते दबोच लिए गए।

पुलिस की इस कार्रवाई को पूरे क्षेत्र में सराहा जा रहा है, और कुमाऊं स्तर पर पुलिस टीम को 5000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। टीम में एसओजी निरीक्षक सलाउद्दीन खान, हेड कांस्टेबल राजभान, कांस्टेबल संतोष सिंह, रमेश सिंह, भुवन बोरा और राजेंद्र कुमार जैसे कर्मठ अधिकारी शामिल थे।

इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड में नशाखोरी की बढ़ती समस्या को उजागर किया है। यह दिखाता है कि कैसे दूरदराज के पहाड़ी इलाके भी अब नशा तस्करों का गढ़ बनते जा रहे हैं। पुलिस की यह सफलता न केवल नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए भी एक मजबूत संदेश देती है। सरकार और पुलिस को मिलकर नशाखोरी के खिलाफ अपनी लड़ाई को और भी तेज करना होगा, ताकि देवभूमि उत्तराखंड को सही मायने में नशा मुक्त बनाया जा सके।

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