ब्रेकिंग

वेब स्टोरी

हेमकुंड साहिब यात्रा 2026: 16 दिन बाद सेना पहुंची, 7 फीट बर्फ हटाने का काम तेज

हेमकुंड साहिब यात्रा 2026: 16 दिन की कड़ी मेहनत के बाद सेना पहुंची, बर्फ हटाने का काम तेज

उत्तराखंड में स्थित पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा को सुचारु बनाने के लिए सेना और सेवादारों की कड़ी मेहनत आखिरकार रंग लाई है। करीब 16 दिनों की लगातार मशक्कत के बाद सेना की टीम बर्फ हटाते हुए हेमकुंड साहिब पहुंच गई है। अब यात्रा मार्ग को पूरी तरह से खोलने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है।

23 मई को खुलेंगे कपाट

हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को खोले जाएंगे। इससे एक दिन पहले लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 22 मई को खोले जाने हैं। ऐसे में प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन यात्रा को समय पर शुरू करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

अभी भी सात फीट तक जमी है बर्फ

हालांकि, रास्ता खोलना आसान नहीं है। हेमकुंड साहिब परिसर में अभी भी करीब सात फीट तक बर्फ जमी हुई है। इतना ही नहीं, हेमकुंड सरोवर भी पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ है। छोटी अटलाकोटी से हेमकुंड तक के रास्ते में भी भारी मात्रा में बर्फ मौजूद है, जिसे हटाने में काफी समय और मेहनत लग रही है।

सेना और सेवादार मिलकर कर रहे हैं काम

इस चुनौतीपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी सेना की इंजीनियरिंग कोर के पास है। इस बार भी 22 जवान और अधिकारी इस मिशन में जुटे हैं। उनके साथ गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के 12 सेवादार भी लगातार सहयोग कर रहे हैं।

यह टीम 16 अप्रैल को घांघरिया बेस कैंप पहुंच गई थी। वहां से रोजाना करीब 3 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर टीम बर्फ हटाने का कार्य कर रही थी। खराब मौसम, बारिश और बर्फबारी ने इस काम को और भी कठिन बना दिया था।

अब हेमकुंड में ही डेरा

अब सेना की टीम ने सीढ़ी वाले मुख्य मार्ग को आंशिक रूप से साफ कर लिया है और खुद भी हेमकुंड साहिब में ही डेरा डाल लिया है। सेवादारों और सेना के जवानों का ठहराव गुरुद्वारे के लंगर में ही किया गया है, जहां से वे रोजाना आगे के काम को अंजाम देंगे।

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में पहले सफाई

गुरुद्वारा प्रबंधन के सीईओ सरदार सेवा सिंह के अनुसार, बर्फ हटाने के कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। सबसे पहले गुरुद्वारा परिसर, लंगर स्थल और चिकित्सालय के आसपास की बर्फ हटाई जाएगी। इसके साथ ही लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के आसपास भी रास्ता साफ किया जाएगा। इसके बाद हेमकुंड सरोवर के एक हिस्से से बर्फ हटाकर श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्था की जाएगी।

अंतिम चरण में मुख्य मार्ग होगा तैयार

अंतिम चरण में हेमकुंड से अटलाकोटी तक करीब छह फीट चौड़े मुख्य पैदल मार्ग से बर्फ हटाई जाएगी, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कठिन परिस्थितियों में जारी है कार्य

ऊंचाई, ठंड और लगातार बदलते मौसम के बीच काम करना आसान नहीं है। बावजूद इसके, सेना और सेवादार पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस कार्य में लगे हुए हैं।

Watch Video

Watch the full video for more details on this story.

You Might Also Like

Facebook Feed