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उत्तराखंड में ग्रामीण विकास को नाबार्ड का सहारा, 2026-27 में 750 करोड़ से सड़कों और सिंचाई योजनाओं को मिलेगी रफ्तार

मध्य हिमालयी राज्य Uttarakhand के दूरस्थ ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। सीमित वित्तीय संसाधनों के बावजूद प्रदेश सरकार इन क्षेत्रों में सड़क, सिंचाई, पुल और अन्य आधारभूत ढांचों को विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस दिशा में National Bank for Agriculture and Rural Development यानी नाबार्ड सरकार का एक महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर उभरा है।

नाबार्ड के माध्यम से राज्य सरकार को सस्ते ऋण के रूप में वित्तीय सहायता मिल रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिल रही है। चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न विभाग अब तक करीब 916 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता विभिन्न योजनाओं के लिए प्राप्त कर चुके हैं।

2026-27 में 750 करोड़ की सहायता से विकास कार्यों को मिलेगी गति

प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी नाबार्ड से मिलने वाली सहायता के जरिए ग्रामीण विकास परियोजनाओं को तेज करने की योजना बना रही है। सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए 750 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से अवस्थापना विकास को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए विभिन्न विभागों से योजनाओं के प्रस्ताव मांगे गए हैं ताकि समय पर परियोजनाओं को स्वीकृति मिल सके और विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों तक सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में कई गांव ऐसे हैं जो दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। यहां सड़क, पेयजल, सिंचाई और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और योजनाओं की जरूरत पड़ती है। ऐसे में नाबार्ड से मिलने वाला सस्ता ऋण प्रदेश सरकार के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है। इससे न केवल वित्तीय दबाव कम होता है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के निर्माण की गति भी तेज होती है।

नाबार्ड से वित्त पोषण की प्रक्रिया आसान नहीं

हालांकि नाबार्ड से वित्त पोषण प्राप्त करना आसान प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए संबंधित विभागों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करनी पड़ती है। इसके अलावा वित्तीय अनुशासन और समयबद्धता का भी सख्ती से पालन करना होता है।

इन सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही परियोजनाओं को स्वीकृति मिलती है और नाबार्ड से वित्तीय सहायता का रास्ता साफ होता है। फिर भी राहत की बात यह है कि नाबार्ड ने हाल के वर्षों में ऋण उपलब्धता को बढ़ाया है, जिससे राज्यों को ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए अधिक संसाधन मिल रहे हैं।

2025-26 में लक्ष्य के करीब पहुंचने की कोशिश

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने नाबार्ड से 1100 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था। इसके मुकाबले अब तक करीब 619.12 करोड़ रुपये की राशि विभागों को मिल चुकी है। वहीं बैंक की ओर से अब तक 665.58 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। हालांकि यह लक्ष्य से थोड़ा कम है, लेकिन सरकार का प्रयास है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले अधिक से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी मिल सके।

विभागों की सुस्ती बनी बड़ी समस्या

सरकार की कोशिशों के बावजूद कई विभागों की धीमी कार्यप्रणाली एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इसी वजह से करीब 155 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा कई ऐसी योजनाएं भी हैं जिन्हें अब तक शुरू नहीं किया जा सका है। इन्हें “नॉन-स्टार्टर योजनाएं” कहा जा रहा है, जो सरकार के लिए चिंता का विषय बन चुकी हैं।

सरकार ने दिए तेज काम के निर्देश

प्रदेश सरकार ने नाबार्ड से मिलने वाले सस्ते ऋण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए विभागों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। नए बजट में भी ग्रामीण क्षेत्रों तक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।साथ ही विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे सुस्त रवैया छोड़कर परियोजनाओं के प्रस्ताव समय पर तैयार करें और कार्यों को तेजी से पूरा करें।

50 हजार से कम आबादी वाले शहरी निकाय भी आएंगे दायरे में

सरकार अब इस योजना का दायरा बढ़ाने की भी तैयारी कर रही है। प्रस्ताव है कि 50,000 से कम जनसंख्या वाले शहरी निकायों को भी इस योजना में शामिल किया जाए ताकि छोटे शहरों में भी आधारभूत ढांचे का विकास हो सके। इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव Anand Bardhan ने विभिन्न विभागों को आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

कई विभागों की परियोजनाओं को मिल रहा लाभ

नाबार्ड के माध्यम से कई विभागों की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मिल रही है। इनमें सिंचाई, लोक निर्माण, विद्यालय शिक्षा, ग्रामीण कार्य विभाग, लघु सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, डेयरी, कृषि, पशुपालन, मत्स्य, पेयजल, बागवानी, कौशल विकास, युवा कल्याण और खेल विभाग शामिल हैं।

इन परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल, सिंचाई प्रणाली और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभाग समय पर परियोजनाओं को पूरा करें और उपलब्ध धनराशि का सही उपयोग करें, तो नाबार्ड के सहयोग से उत्तराखंड के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में विकास की नई रफ्तार देखने को मिल सकती है।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में गांवों तक बेहतर सड़क, शिक्षा, सिंचाई और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जाएं ताकि ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार हो सके।

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