देहरादून में गाने को लेकर विवाद बना जानलेवा, बीटेक छात्र दिव्यांशु की पीट-पीटकर हत्या
देहरादून में गाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बना जानलेवा, बीटेक छात्र की हत्या
उत्तराखंड के देहरादून से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मामूली विवाद ने एक छात्र की जान ले ली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बिहार के छात्रों के बीच गानों को लेकर शुरू हुई वर्चस्व की लड़ाई आखिरकार बीटेक छात्र दिव्यांशु की मौत पर जाकर खत्म हुई। यह घटना न केवल छात्रों के बीच बढ़ती गुटबाजी को उजागर करती है, बल्कि समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
जानकारी के अनुसार, यह विवाद करीब दो महीने पहले शुरू हुआ था। जब दिव्यांशु के दोस्तों ने विश्वविद्यालय के गेट के सामने कार में “छोरा जाट्टा” गाना बजाया था। इस पर बिहार के छात्रों के एक गुट ने इसे अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ चुनौती के रूप में लिया। इसके बाद दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ता गया और कई बार मारपीट की घटनाएं भी सामने आईं।
पहले भी हो चुकी थी मारपीट
बताया जा रहा है कि करीब 15 दिन पहले आरोपियों ने दिव्यांशु के समूह के एक छात्र के साथ मारपीट की थी। उसके कपड़े तक फाड़ दिए गए थे। इसके तीन दिन बाद फिर उसी छात्र के साथ मारपीट कर उसकी बाइक छीन ली गई और उसे तोड़कर जंगल में फेंक दिया गया। इतना ही नहीं, आरोपी गुट के करीब 20 लोग हॉस्टल तक दिव्यांशु को ढूंढने भी पहुंचे थे।
बाजार में किया गया हमला
सोमवार रात जब दिव्यांशु प्रेम नगर बाजार में खाना खाने गया, तभी आरोपी युवक वहां पहुंच गए। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने पहले उसे धमकाया और कहा कि अगर यहां रहना है तो उनके दबाव में रहना होगा। जैसे ही दिव्यांशु ने विरोध किया, करीब 15 युवकों ने उस पर लाठी-डंडों और फावड़े से हमला कर दिया।
लोगों की चुप्पी ने बढ़ाया दर्द
इस पूरी घटना का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि भीड़भाड़ वाले बाजार में यह हमला होता रहा, लेकिन कोई भी व्यक्ति उसे बचाने के लिए आगे नहीं आया। लोग तमाशबीन बने रहे और दिव्यांशु को बेरहमी से पीटा जाता रहा। आखिरकार एक दंपत्ति ने मानवता दिखाते हुए उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दिव्यांशु अपने परिवार के बड़े बेटे थे और बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। उनके माता-पिता को उनसे काफी उम्मीदें थीं कि वह पढ़ाई पूरी कर नौकरी करेंगे और परिवार का सहारा बनेंगे। उनके पीछे एक छोटा भाई है, जिसने हाल ही में 12वीं की परीक्षा दी है। इस घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
पुलिस पर भी उठे सवाल
दिव्यांशु के दोस्तों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही इस मामले की शिकायत प्रेम नगर थाने में की थी, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हालांकि पुलिस का कहना है कि छात्रों के झगड़ों की शिकायतें अक्सर आती रहती हैं और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और क्षेत्र में सघन अभियान चलाया गया।
- 8 हॉस्टल संचालकों पर 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया
- 75 छात्रों से पूछताछ की गई
- 52 वाहनों का चालान किया गया
- 24 लोगों के खिलाफ पुलिस एक्ट में कार्रवाई हुई
एसएसपी ने कहा कि गुटबाजी करने वाले छात्रों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गैंग बनाकर करते थे दबंगई
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी गुट खुद को “बिहार डिफॉल्टर” के नाम से पहचानता था। इस गुट में अधिकतर बिहार के छात्र शामिल थे और वे विश्वविद्यालय में कमजोर छात्रों पर दबाव बनाकर अपनी दबंगई चलाते थे।
एंबुलेंस भी बनी लापरवाही की मिसाल
घटना के बाद घायल दिव्यांशु को अस्पताल ले जाने के लिए जो एंबुलेंस आई, वह मात्र 100 मीटर चलने के बाद ही खराब हो गई। इसके बाद पुलिस को अपनी गाड़ी से ही उसे अस्पताल पहुंचाना पड़ा, जिससे स्थिति की गंभीरता और भी बढ़ गई।
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