देहरादून: ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग में कमीशनखोरी..
देहरादून। केंद्र की मोदी सरकार और उत्तराखंड की धामी सरकार लगातार ‘डबल इंजन’ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती रही हैं। लेकिन राजधानी देहरादून से सामने आया एक ताजा मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
देहरादून स्थित उत्तराखंड डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग में तैनात वित्तीय नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद पर काम के बदले कमीशन मांगने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि वे टेंडर और भुगतान प्रक्रिया में प्रतिशत के आधार पर रकम की मांग कर रहे थे।
रनिंग बिल्स पर 4-5% कमीशन, लेटर ऑफ अवार्ड पर 2% कमीशन की मांग की जा रही थी।
यह भी कहा गया कि “बॉस से बात कर” रनिंग बिल्स पर यह प्रतिशत 5-7% तक बढ़ाया जा सकता है।
सरकार के दावों पर सवाल
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात कर रहे हैं। ऐसे में किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा खुलेआम कमीशन मांगने के आरोप न केवल विभाग की कार्यप्रणाली, बल्कि निगरानी और सतर्कता तंत्र पर भी सवाल उठाते हैं।
विकास कार्यों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अवैध उगाही:
विकास कार्यों की गुणवत्ता को प्रभावित करती है
सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग बढ़ाती है, ईमानदार कार्यसंस्कृति को कमजोर करती है
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस मामले में ठोस और पारदर्शी कार्रवाई करेगी?
क्या संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच और दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे, या फिर ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा सिर्फ मंचों तक ही सीमित रह जाएगा?
फिलहाल, पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है और सभी की नजरें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
नेशंन वंन प्रमुखता के साथ ऐसे ही पोल खोलता रहेगा और चेहरे पर पड़े नकाब को हटाता रहेगा।
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