उत्तराखंड में नशे के कारोबार पर बड़ा सवाल: 2024 में ₹76 करोड़ की ड्रग्स बरामद, सितंबर 2026 तक ₹46 करोड़ का नशा पकड़ा गया
देहरादून में नशे के खिलाफ आयोजित प्रशिक्षण शिविर में एडीजी वी. मुरुगेशन ने ड्रग्स तस्करी को गंभीर चुनौती बताते हुए इसके नेटवर्क को तोड़ने और नशे की मांग कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और ड्रोन तथा समुद्री मार्गों के जरिए होने वाली सप्लाई पर प्रभावी कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण है।
शिविर में सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड में वर्ष 2024 के दौरान करीब 76 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामद की गई थी, जबकि सितंबर 2026 तक करीब 46 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ पकड़े जाने की जानकारी दी गई। ये आंकड़े नशे के खिलाफ कार्रवाई का पैमाना बताते हैं, लेकिन तस्करी के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए बरामदगी के साथ अन्य कदम उठाने की जरूरत भी सामने लाते हैं।
ड्रोन और समुद्री रास्तों से सप्लाई बड़ी चुनौती
एडीजी वी. मुरुगेशन के मुताबिक, नशे की तस्करी अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। तस्करी के नेटवर्क नए रास्तों और तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ड्रोन के जरिए सीमावर्ती इलाकों में नशीले पदार्थों की सप्लाई और समुद्री मार्गों का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है।
उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि नशे के खिलाफ अभियान केवल बरामदगी और गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तस्करी के पूरे तंत्र को कमजोर करना जरूरी है।
90 प्रतिशत तस्करों के बाहर होने का दावा
प्रशिक्षण शिविर में एडीजी ने कहा कि नशे के अवैध कारोबार का बड़ा हिस्सा पकड़ से बाहर रह जाता है। उनके मुताबिक, यदि केवल 10 प्रतिशत नशा पकड़ा जा रहा है, तो 90 प्रतिशत तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई की चुनौती बनी हुई है।
यह आंकड़ा उनके बयान के संदर्भ में सामने आया है। इसकी गणना का आधार या स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट नहीं मिली है। हालांकि, इस दावे से पुलिस के सामने मौजूद चुनौती स्पष्ट होती है कि बरामदगी के साथ सप्लाई चेन, वित्तीय नेटवर्क और नशे की मांग पर भी काम करना होगा।
देहरादून में 2026 के दौरान भी जारी है कार्रवाई
देहरादून में नशे के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े भी इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की 6 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में इस साल अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 208 मामले दर्ज किए गए थे और 237 आरोपियों को जेल भेजा गया था
वहीं, 23 सितंबर 2026 को इंडिया टुडे ने रिपोर्ट किया कि देहरादून में दो अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान छह छात्रों को गिरफ्तार किया गया और 44.61 ग्राम एमडीएमए बरामद की गई। पुलिस के मुताबिक, मामले में दिल्ली के एक गिरोह से संबंधों की जांच की जा रही थी।
नशामुक्त उत्तराखंड के लिए जनभागीदारी पर जोर
9 सितंबर 2026 को लोक भवन में आयोजित ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’ कार्यक्रम में भी नशे की रोकथाम के लिए परिवारों, शिक्षण संस्थानों और समुदायों की भूमिका पर जोर दिया गया था। कार्यक्रम में ‘देहरादून घोषणा-पत्र’ जारी किया गया, जिसमें युवाओं को नशे से बचाने, उपचार और पुनर्वास तथा सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल थे।
इसके बाद 11 सितंबर को राज्यपाल और पुलिस महानिदेशक की बैठक में भी ‘ड्रग्स फ्री देवभूमि’ अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समन्वित कार्ययोजना और जनभागीदारी की जरूरत पर बल दिया गया।
नशे के खिलाफ लड़ाई में क्या जरूरी?
नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए तीन स्तरों पर काम करना जरूरी है। पहला, तस्करी के नेटवर्क और सप्लाई चेन को तोड़ना। दूसरा, नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार और पुनर्वास उपलब्ध कराना। तीसरा, युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और नशीले पदार्थों की मांग कम करना।
एडीजी वी. मुरुगेशन का संदेश भी इसी दिशा में है कि केवल नशीले पदार्थ पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा। नशे की सप्लाई और मांग दोनों पर प्रभावी कार्रवाई के साथ ही इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशना होगा।









