उत्तराखंड में बदले होम स्टे योजना के नियम, अब गांवों को मिलेगा सामुदायिक पर्यटन मॉडल का लाभ
उत्तराखंड में बदले होम स्टे योजना के नियम, अब गांवों को मिलेगा सामुदायिक पर्यटन मॉडल का लाभ
उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली होम स्टे योजना को सरकार ने बड़े स्तर पर रिफॉर्म किया है। नई नियमावली के जरिए सरकार ने योजना को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और ग्रामीणों के लिए लाभकारी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं।
सरकार का मानना है कि होम स्टे योजना के मूल उद्देश्य — ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना और पलायन रोकना — को फिर से मजबूत करने की जरूरत थी। इसी को देखते हुए नई नीति में कई बड़े बदलाव किए गए हैं।
उत्तराखंड में मील का पत्थर बनी होम स्टे योजना
उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की होम स्टे योजना साल 2015 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को अपने घरों के जरिए रोजगार उपलब्ध कराना था ताकि युवाओं को नौकरी की तलाश में शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।यह योजना इतनी सफल रही कि अलग-अलग सरकारों ने इसे लगातार आगे बढ़ाया। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को नई पहचान मिली और स्थानीय उत्पादों, संस्कृति तथा पारंपरिक खानपान को भी बढ़ावा मिला।
अब उत्तराखंड में 5 हजार से ज्यादा पंजीकृत होम स्टे
पर्यटन विभाग के अनुसार राज्य में वर्तमान समय में 5 हजार से अधिक होम स्टे पंजीकृत हैं।पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक करीब 1500 लोगों को होम स्टे योजना के तहत सब्सिडी भी दी जा चुकी है। इसके अलावा ट्रेकिंग और अट्रैक्शन योजना के तहत कई गांवों में कमरों का रिनोवेशन कराया गया है।
क्यों जरूरी पड़ा नियमों में बदलाव?
सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि योजना का गलत इस्तेमाल हो रहा है। कई बाहरी लोग भी इस योजना का लाभ उठा रहे थे, जबकि इसका उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों को फायदा पहुंचाना था।इसी वजह से सरकार ने होम स्टे पॉलिसी में संशोधन कर इसे और मजबूत बनाने का फैसला लिया।
नई होम स्टे नीति में क्या-क्या बदला?
नई नियमावली के तहत अब होम स्टे में पहले की तुलना में ज्यादा कमरे पंजीकृत किए जा सकेंगे।
नए नियमों की प्रमुख बातें
- अब होम स्टे में अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत किए जा सकेंगे।
- कुल बेड की संख्या 24 से अधिक नहीं होगी।
- पंजीकरण केवल ग्रामीण क्षेत्रों और नगर पंचायत क्षेत्रों में ही होगा।
- केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासी ही इस योजना का लाभ ले सकेंगे।
- भवन स्वामी या उसका परिवार उसी भवन में स्थायी रूप से निवासरत होना जरूरी होगा।
- बीएनबी (Bed & Breakfast) इकाइयों को भी पर्यटन इकाई के रूप में शामिल किया गया है।
- सभी पर्यटन इकाइयों की पंजीकरण वैधता 5 साल होगी।
- ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और डिजिटल वेरिफिकेशन को अनिवार्य बनाया गया है।
- अब सेल्फ रिन्यूअल की सुविधा भी मिलेगी।
सामुदायिक पर्यटन मॉडल से बदलेगी गांवों की तस्वीर
नई नीति में सबसे बड़ा बदलाव “सामुदायिक आधारित पर्यटन इकाई” को माना जा रहा है।पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद के अनुसार अब 8 से 10 होम स्टे मिलकर एक सामुदायिक पर्यटन मॉडल तैयार कर सकेंगे।यह मॉडल किसी एक गांव या 3 से 6 गांवों के समूह में लागू किया जा सकेगा। इसका मकसद पूरे गांव को पर्यटन से जोड़ना और सामूहिक रूप से रोजगार बढ़ाना है।
गांव खुद बनेंगे पर्यटन डेस्टिनेशन
नई व्यवस्था के तहत गांव अपनी संस्कृति, लोक जीवन, पारंपरिक भोजन और प्राकृतिक सुंदरता को पर्यटन के जरिए दुनिया के सामने पेश कर सकेंगे।इससे न केवल गांवों को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
आसान हुई रिन्यूअल प्रक्रिया
पहले होम स्टे का रिन्यूअल कराने के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब सरकार ने इसे काफी आसान बना दिया है।अब ऑनलाइन फीस जमा कर सेल्फ रिन्यूअल किया जा सकेगा, जिससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
विशेषज्ञ मानते हैं कि नई होम स्टे नीति उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी, गांवों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और पलायन पर भी काफी हद तक रोक लग सकेगी।सरकार का फोकस अब सिर्फ व्यक्तिगत होम स्टे तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गांवों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर है।
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