लैंसडोन के पठानकोट वन क्षेत्र में भीषण आग, हजारों पौधे जलकर नष्ट
लैंसडोन के पठानकोट वन क्षेत्र में लगी आग, हजारों पौधे जलकर नष्ट
लैंसडोन छावनी परिषद के पठानकोट वन क्षेत्र में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। आग तेजी से जंगल के बड़े हिस्से में फैल गई, जिससे हजारों की संख्या में छोटी पौध जलकर नष्ट हो गईं। आग की सूचना मिलते ही छावनी परिषद के वनकर्मी और सेना के जवान मौके पर पहुंचे और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।जानकारी के अनुसार, वनाग्नि से करीब दो हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। हालांकि राहत की बात यह रही कि बड़े पेड़ों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा।
छह घंटे की मशक्कत के बाद बुझी आग
वन विभाग के अनुसार, आग पर नियंत्रण पाने में करीब छह घंटे का समय लगा। आग लगातार फैल रही थी, जिसके कारण वनकर्मियों और सेना के जवानों को काफी कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा।संयुक्त प्रयासों के चलते आखिरकार आग को फैलने से रोक लिया गया। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता था।
हजारों छोटी पौध हुई नष्ट
बीरबल सिंह ने बताया कि आग की चपेट में आने से हजारों छोटी पौध पूरी तरह नष्ट हो गईं। उन्होंने कहा कि आग मुख्य रूप से जंगल के निचले हिस्से में फैली, जहां नई पौध तैयार की गई थी।वन विभाग के अनुसार, बड़े और पुराने पेड़ों को इस आग से कोई विशेष नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन नई वनस्पति को भारी क्षति हुई है।
गर्मी और सूखे मौसम से बढ़ रहा खतरा
उत्तराखंड के कई वन क्षेत्रों में गर्मी बढ़ने और सूखे मौसम के कारण वनाग्नि की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में सूखी घास और पत्तियां आग फैलने का मुख्य कारण बनती हैं।वन विभाग लगातार लोगों से जंगलों में आग से सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध घटना की तुरंत सूचना देने की अपील कर रहा है।
पर्यावरण पर पड़ सकता है असर
वनाग्नि की घटनाओं का असर पर्यावरण और जैव विविधता पर भी पड़ता है। छोटी पौध और वनस्पतियां नष्ट होने से जंगलों के प्राकृतिक संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते आग पर नियंत्रण पाना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि गर्मियों में तेज हवा के कारण आग तेजी से फैल सकती है।
प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई
घटना के बाद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है that आने वाले दिनों में वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाएगी ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि जंगलों में जलती सामग्री, बीड़ी-सिगरेट या अन्य ज्वलनशील वस्तुएं न फेंकें, जिससे वनाग्नि की घटनाओं को रोका जा सके।
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