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रामायण पर बयान देकर घिरे प्रकाश राज, धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में शिकायत दर्ज

रामायण पर बयान देकर घिरे प्रकाश राज, दिल्ली में शिकायत दर्ज

एक्टर प्रकाश राज एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में आ गए हैं। इस बार मामला हिंदू महाकाव्य रामायण से जुड़ा है, जिस पर की गई उनकी टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया है। उनके खिलाफ दिल्ली में शिकायत भी दर्ज कराई गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद उस बयान से जुड़ा है, जो प्रकाश राज ने जनवरी में केरल लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान दिया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने बच्चों के एक थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत एक काल्पनिक और रचनात्मक रामायण की कहानी का जिक्र किया।

इस कहानी में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता को दक्षिण भारत की ओर जाते हुए दिखाया गया। कथानक के अनुसार, रास्ते में भूख लगने पर वे रावण के बगीचे से फल खाते हैं और बाद में भुगतान को लेकर संवाद होता है, जिसमें आधुनिक संदर्भ जैसे जीएसटी और डिस्काउंट का जिक्र भी किया गया।

बयान में क्या था विवाद?

प्रकाश राज ने इस कहानी को साझा करते हुए उत्तर और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक मुद्दों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत से आने वाले लोग दक्षिण भारत पर हिंदी या खान-पान से जुड़ी आदतें थोपने की कोशिश न करें।उनका यह बयान कई लोगों को आपत्तिजनक लगा, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें धार्मिक पात्रों को आधुनिक और हास्यपूर्ण संदर्भ में प्रस्तुत किया गया था।

शिकायत दर्ज

इस मामले को लेकर दिल्ली में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है। वकील अमिता सचदेवा ने दिल्ली पुलिस के साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर सेल में प्रकाश राज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक्टर ने जानबूझकर ऐसा बयान दिया, जिससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह के बयानों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा।

बढ़ता विवाद

यह पहली बार नहीं है जब प्रकाश राज अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हैं। वे अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं, जिससे कई बार उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ता है।इस मामले में भी उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे धार्मिक आस्था का अपमान मान रहे हैं।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम आस्था

यह विवाद एक बार फिर उस बहस को सामने लाता है, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान के बीच संतुलन की बात होती है। जहां कलाकार और लेखक रचनात्मक स्वतंत्रता की बात करते हैं, वहीं धार्मिक समुदाय अपनी आस्थाओं के सम्मान की अपेक्षा रखते हैं।

फिलहाल इस मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या कोई कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं।

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