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Uttarakhand Liquor Price Hike: 1 अप्रैल से शराब महंगी, अंग्रेजी शराब के दाम बढ़े

Uttarakhand Liquor Price Hike: 1 अप्रैल से शराब महंगी, जानिए नई दरें

उत्तराखंड में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही शराब के दामों में बढ़ोतरी कर दी गई है। बुधवार, 1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के तहत शराब की कीमतों में 10 से 20 रुपये तक की वृद्धि की गई है। हालांकि, इस बार सरकार ने बढ़ोतरी को सीमित रखा है ताकि आम उपभोक्ताओं पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े।

अंग्रेजी शराब महंगी, देशी शराब को राहत

आबकारी विभाग की आयुक्त Anuradha Pal के अनुसार, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से अंग्रेजी शराब (IMFL) पर लागू की गई है। वहीं, देशी शराब के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे उन उपभोक्ताओं को राहत मिली है जो कम कीमत वाली शराब का सेवन करते हैं। यह निर्णय राज्य सरकार की संतुलित नीति को दर्शाता है, जिसमें राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ आम जनता के हितों का भी ध्यान रखा गया है।

सरकार को मिला बड़ा राजस्व

आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही बीते वर्ष के मुकाबले 250 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त वसूली कर ली है। यह उपलब्धि राज्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इससे सरकार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।

नए वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने 5400 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। दिलचस्प बात यह है कि इस लक्ष्य में से लगभग 2600 करोड़ रुपये पहले ही शराब दुकानों के सेटलमेंट के माध्यम से हासिल कर लिए गए हैं।

राज्य में 700 शराब की दुकानें संचालित

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखंड में करीब 700 शराब की दुकानों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से अधिकांश दुकानों का आवंटन और नवीनीकरण प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। यह कदम राज्य में शराब वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

ब्रांड के अनुसार बदल सकते हैं दाम

आबकारी विभाग के अनुसार, शराब की अंतिम कीमतें संबंधित कंपनियों द्वारा भी तय की जाती हैं। ऐसे में अलग-अलग ब्रांड्स के हिसाब से कीमतों में बदलाव संभव है। कुछ ब्रांड्स में मामूली कमी भी देखी जा सकती है, जबकि अन्य में 10-20 रुपये तक की बढ़ोतरी लागू रहेगी। इसका मतलब है कि उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय ब्रांड के अनुसार कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है।

संतुलित नीति पर सरकार का फोकस

इस बार सरकार ने शराब की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करने के बजाय सीमित वृद्धि का रास्ता अपनाया है। इससे एक ओर जहां राजस्व में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर आम जनता पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार का फोकस स्पष्ट रूप से राजस्व बढ़ाने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने पर है।

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