रुद्रप्रयाग में दर्दनाक घटना: 9 दिन बाद जंगल में मिला 4 साल के मासूम मयंक का शव
रुद्रप्रयाग में दर्दनाक घटना: 9 दिन बाद जंगल में मिला 4 साल के मासूम मयंक का शव
रुद्रप्रयाग जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। बाड़ब गांव का रहने वाला 4 वर्षीय मासूम मयंक उर्फ पंकू, जो 4 अप्रैल को अपनी मां के पीछे-पीछे जंगल की ओर गया था, अचानक लापता हो गया था।
इस घटना के बाद से परिवार और पूरे गांव में चिंता का माहौल बन गया था। हर दिन उम्मीद थी कि मासूम सुरक्षित लौट आएगा, लेकिन 9 दिन बाद जो खबर सामने आई, उसने सभी को तोड़ कर रख दिया।
9 दिन बाद जंगल में मिला मासूम का शव
लगातार 9 दिनों तक चली खोजबीन के बाद आखिरकार जंगल में मासूम मयंक का शव बरामद हुआ। इस खबर के सामने आते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
जिस घर में बच्चे की वापसी की उम्मीद में दरवाजे खुले रखे गए थे, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। परिवार के सदस्य रो-रोकर बेहाल हैं और गांव के लोग भी इस दुखद घटना से गहरे सदमे में हैं।
गुमशुदगी के बाद शुरू हुआ था सर्च ऑपरेशन
मयंक के लापता होने के तुरंत बाद ग्रामीणों ने खोजबीन शुरू कर दी थी। इसके बाद पुलिस, SDRF (State Disaster Response Force) और डॉग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाया गया।
घने जंगल और पहाड़ी इलाका होने के कारण सर्च ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण था। बावजूद इसके, लगातार प्रयास जारी रहे। लेकिन कई दिनों तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ती गई।
जंगली जानवर के हमले की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस इस मामले में कई पहलुओं पर जांच कर रही है। इसमें जंगली जानवर के हमले की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र वन क्षेत्र के काफी करीब है।
हालांकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है ताकि मौत के असली कारण का पता लगाया जा सके।
परिवार और गांव में गहरा मातम
मयंक की मौत की खबर ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति सामान्य बताई जा रही है, और इस तरह की घटना ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया है।
गांव के लोग लगातार परिवार के साथ खड़े हैं और इस दुख की घड़ी में सांत्वना दे रहे हैं। हर किसी की आंखें नम हैं और दिल में एक ही सवाल है—एक मासूम के साथ ऐसा क्यों हुआ?
पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी और जंगल से सटे क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में छोटे बच्चों को अकेला छोड़ना या उन्हें बिना निगरानी के जंगल की ओर जाने देना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों को मिलकर इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन और पुलिस की अपील
पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बच्चों पर विशेष ध्यान रखें और उन्हें जंगल या सुनसान इलाकों में अकेले न जाने दें।
साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि या घटना की तुरंत सूचना प्रशासन को देने की सलाह दी गई है।
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