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उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना शुरू: घर बैठे करें स्वगणना, जानें पूरी प्रक्रिया

उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना की शुरुआत, अब घर बैठे करें स्वगणना

उत्तराखंड में जनगणना प्रक्रिया के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार से हो गई है। इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल रूप दिया गया है, जिसमें आम नागरिक खुद ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस नई व्यवस्था को स्वगणना (Self Enumeration) कहा जा रहा है, जो देश में पहली बार बड़े स्तर पर लागू की जा रही है।

इस प्रक्रिया की शुरुआत राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने देहरादून स्थित लोकभवन में की। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी अपने आवास से स्वगणना प्रक्रिया में भाग लेंगे।

आमजन के लिए खुला ऑनलाइन पोर्टल

जनगणना के लिए स्वगणना पोर्टल आम लोगों के लिए गुरुवार रात 12 बजे से खोल दिया गया है। नागरिक Census Self Enumeration Portal पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस पोर्टल के माध्यम से कोई भी भवन स्वामी अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर से घर बैठे जनगणना फॉर्म भर सकता है।

पहले चरण में मकानों का सूचीकरण

जनगणना के पहले चरण में मकानों की सूची तैयार की जाएगी। इसके तहत हर भवन और उसमें रहने वाले परिवारों का विवरण दर्ज किया जाएगा। इस बार की प्रक्रिया में खास बात यह है कि नागरिक स्वयं यह जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं, जिससे पारदर्शिता और सटीकता बढ़ने की उम्मीद है।

फॉर्म भरने के दौरान नागरिकों को कुल 33 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। इन प्रश्नों के लिए विकल्प भी दिए गए हैं, जिससे प्रक्रिया आसान हो जाती है।

जियो टैगिंग है जरूरी

स्वगणना करते समय एक महत्वपूर्ण पहलू जियो टैगिंग भी है। इसका मतलब है कि आपको अपने घर की लोकेशन को डिजिटल रूप से चिह्नित करना होगा। इसलिए यह जरूरी है कि फॉर्म घर से ही भरा जाए, ताकि सही स्थान दर्ज हो सके।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

स्वगणना प्रक्रिया के दौरान कुछ महत्वपूर्ण निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है:

  • एक भवन के लिए केवल एक मोबाइल नंबर का ही उपयोग करें
  • परिवार के मुखिया का नाम सावधानीपूर्वक दर्ज करें
  • भाषा का चयन सोच-समझकर करें, क्योंकि बाद में बदलाव संभव नहीं
  • फॉर्म भरने से पहले सभी जानकारी अच्छी तरह जांच लें
  • सबमिट करने से पहले बदलाव किया जा सकता है, लेकिन जमा करने के बाद नहीं
  • अपनी एसई (SE) आईडी को सुरक्षित रखें और केवल अधिकृत प्रगणक को ही दें

अंतिम तिथि और आगे की प्रक्रिया

स्वगणना की प्रक्रिया 24 अप्रैल की रात 12 बजे तक जारी रहेगी। इसके बाद 25 अप्रैल से जनगणना कर्मी (प्रगणक) घर-घर जाकर मकानों का सत्यापन और सूचीकरण करेंगे।

डिजिटल जनगणना का महत्व

इस बार की डिजिटल जनगणना कई मायनों में खास है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि डेटा की सटीकता और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। साथ ही, नागरिकों को अपनी जानकारी खुद भरने का अवसर मिलेगा, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होगी।

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