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उधमसिंह नगर में बड़ा खुलासा: जसपुर ब्लॉक में 371 परिवारों के 2005 से पहले के रिकॉर्ड गायब

उधमसिंह नगर में बड़ा खुलासा: जसपुर ब्लॉक में 371 परिवारों के रिकॉर्ड पर उठे सवाल

उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के जसपुर ब्लॉक में प्रशासनिक जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 371 ऐसे परिवार चिन्हित किए गए हैं, जिनका वर्ष 2005 से पहले का कोई भी रिकॉर्ड ग्राम पंचायत के अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी गई है।

जांच में सामने आया बड़ा अंतर

प्रशासन द्वारा की गई जांच में पाया गया कि इन परिवारों का संबंधित गांवों से कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परिवार रजिस्टर में इनकी प्रविष्टियां बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के दर्ज की गई थीं। इससे पंचायत अभिलेखों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इन 371 परिवारों में कुल 1766 व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इनमें अधिकांश परिवार मुस्लिम समुदाय से संबंधित हैं। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह दस्तावेजों और प्रक्रिया के आधार पर की जा रही है।

सरकार के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन को लेकर प्रदेशभर में अभियान तेज किया गया है। इसी क्रम में जसपुर ब्लॉक में भी दस्तावेजों की जांच शुरू की गई। एसडीएम राहुल शाह के नेतृत्व में वर्ष 2005 के बाद दर्ज किए गए रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया, जिसमें यह अनियमितता सामने आई।

परिवारों को भेजे जाएंगे नोटिस

प्रशासन ने सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित परिवारों के मुखियाओं को नोटिस जारी करें। इन परिवारों को अपने रिकॉर्ड के समर्थन में वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि जांच में कोई प्रविष्टि अवैध पाई जाती है, तो उसे परिवार रजिस्टर से हटा दिया जाएगा।


क्या है परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने की प्रक्रिया

प्रशासन के अनुसार, किसी भी परिवार का नाम ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में दर्ज करने के लिए एक तय प्रक्रिया होती है:

  • सबसे पहले संबंधित व्यक्ति को ग्राम पंचायत में आवेदन देना होता है
  • इसके बाद आवेदन को खुली बैठक में रखा जाता है
  • प्रस्ताव पास होने के बाद एडीओ पंचायत द्वारा जांच की जाती है
  • सत्यापन के बाद ही परिवार का नाम रजिस्टर में दर्ज किया जाता है

लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया सही तरीके से अपनाई नहीं गई, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।

पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर

प्रशासन का कहना है कि अभिलेखों की शुद्धता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी है। जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह स्पष्ट है कि लापरवाही या अनियमितता के मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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