धारी देवी मंदिर के पास शराब की बोतलें मिलने से मचा हड़कंप, आस्था और पर्यावरण पर बड़ा सवाल
धारी देवी मंदिर के पास शराब की बोतलें मिलने से बढ़ी चिंता, आस्था स्थल पर गंदगी का अंबार
उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल स्थित प्रसिद्ध धारी देवी मंदिर, जिसे चारधामों की रक्षक देवी के रूप में माना जाता है, इन दिनों एक चिंताजनक वजह से चर्चा में है। मंदिर परिसर के आसपास भारी मात्रा में शराब की खाली बोतलें और कूड़ा मिलने से न केवल स्थानीय लोगों में आक्रोश है, बल्कि आस्था और पर्यावरण दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पवित्र स्थल पर गंदगी का अंबार
हाल ही में ऋषिकेश से आए कुछ युवाओं ने धारी देवी मंदिर क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान करीब 100 किलो कूड़ा एकत्र किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतलें शामिल थीं। इस दृश्य को देखकर अभियान से जुड़े लोगों ने गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया।
द हिमाद्री फाउंडेशन के तहत चलाए गए इस अभियान में अनुरिमा नौटियाल और शगुन उनियाल ने बताया कि जो कूड़ा इकट्ठा किया गया है, वह कुल गंदगी का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा हो सकता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे क्षेत्र में कितनी बड़ी मात्रा में कूड़ा फैला हुआ है।
युवाओं और स्थानीय लोगों ने मिलकर उठाया कदम
इस सफाई अभियान में गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रों और स्थानीय ग्रामीणों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने मिलकर मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों को साफ करने की कोशिश की, लेकिन समस्या की गंभीरता देखकर सभी हैरान रह गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धारी देवी जैसे पवित्र स्थान के पास इस तरह की गतिविधियां न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाती हैं।
आस्था बनाम लापरवाही
धारी देवी मंदिर को लेकर मान्यता है कि यह स्थल उत्तराखंड के चारधामों की रक्षा करता है। एक प्रचलित कथा के अनुसार, जब मंदिर को उसके मूल स्थान से हटाया गया था, तो उसके अगले ही दिन केदारनाथ में भीषण आपदा आई थी। हालांकि यह धार्मिक आस्था और मान्यताओं का विषय है, लेकिन इससे यह जरूर स्पष्ट होता है कि लोगों के मन में इस मंदिर के प्रति गहरी श्रद्धा है।
ऐसे में मंदिर के आसपास शराब पीकर बोतलें फेंकना और कूड़ा फैलाना एक गंभीर लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है। सवाल उठता है कि क्या हम अपनी आस्था स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के प्रति सचेत हैं?
प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्या ऐसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर पर्याप्त निगरानी और सफाई व्यवस्था है? साथ ही, यह समाज के लिए भी आत्ममंथन का विषय है कि क्या हम खुद अपने पर्यावरण और धार्मिक स्थलों के प्रति जिम्मेदार हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती, बल्कि जनजागरूकता और सामाजिक भागीदारी भी बेहद जरूरी है।
पर्यावरण संरक्षण की जरूरत
उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ कहा जाता है, लेकिन लगातार बढ़ते पर्यटन और लापरवाही के चलते यहां के प्राकृतिक और धार्मिक स्थल प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं। धारी देवी मंदिर के पास मिला कूड़ा इसी समस्या का एक उदाहरण है।
जरूरत इस बात की है कि लोग न केवल इन स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखें, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। प्लास्टिक और शराब की बोतलों का खुले में फेंका जाना न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि यह सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
धारी देवी मंदिर के पास कूड़ा और शराब की बोतलें मिलना एक चेतावनी है कि अगर समय रहते हम नहीं जागे, तो हमारे पवित्र स्थल अपनी पहचान खो सकते हैं। यह केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इन स्थलों की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान दे।
अब समय आ गया है कि हम अपनी आस्था को केवल मानने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने व्यवहार में भी उतारें।
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