धामी सरकार की दूसरी सूची जारी: 21 नेताओं को आयोगों और परिषदों में मिली बड़ी जिम्मेदारियां
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने दायित्वधारियों की दूसरी सूची जारी कर दी है। रविवार को जारी इस सूची में 7 नए नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें विभिन्न आयोगों, परिषदों और समितियों में सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। इससे पहले शुक्रवार को ही सरकार 14 नेताओं को जिम्मेदारी सौंप चुकी थी। इस तरह कुल मिलाकर 21 नेताओं को सरकार ने अहम पदों पर तैनात किया है।
सरकार के इस फैसले को संगठनात्मक संतुलन और कार्यकर्ताओं को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता जिम्मेदारी मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे, जिन्हें अब इन नियुक्तियों के जरिए संतुष्ट करने की कोशिश की गई है।
दूसरी सूची में इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी
रविवार को जारी सूची में जिन सात नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, उनमें राव खाले खां को किसान आयोग का सदस्य बनाया गया है। योगेश रजवार को बाल संरक्षक आयोग में सदस्य नियुक्त किया गया है। दीप प्रकाश नेवलिया को समाज कल्याण अनुश्रवण समिति में जगह मिली है, जबकि मनोज गौतम को अनुसूचित जाति आयोग का सदस्य बनाया गया है।
इसके अलावा प्रेमलता को महिला आयोग में सदस्य की जिम्मेदारी दी गई है। रूचि गिरी को अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग में शामिल किया गया है और राजपाल कश्यप को अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद में सदस्य नियुक्त किया गया है।
पहली सूची में 14 नेताओं को मिला था मौका
इससे पहले शुक्रवार को जारी पहली सूची में 14 नेताओं को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया था। देहरादून के कुलदीप सुटोला को राज्य स्तरीय खेल परिषद का अध्यक्ष बनाया गया। नैनीताल के ध्रुव रौतेला को मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
चंपावत की हरिप्रिया जोशी को राज्य महिला आयोग में सदस्य बनाया गया, जबकि टिहरी के विनोद सुयाल को राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद में शामिल किया गया। चंपावत के मुकेश महराना को चाय विकास सलाहकार परिषद में जिम्मेदारी दी गई।
अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां
सरकार ने अन्य कई नेताओं को भी अलग-अलग निकायों में शामिल किया है। देहरादून की चारु कोठारी को राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद में स्थान मिला है। चमोली के प्रेम सिंह राणा को जनजाति आयोग में शामिल किया गया है।
टिहरी के खेम सिंह चौहान को ओबीसी कल्याण परिषद में सदस्य बनाया गया है, जबकि सोना सजवाण को जड़ी-बूटी सलाहकार समिति में जिम्मेदारी दी गई है। अल्मोड़ा के गोविंद पिलखवात को हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद में शामिल किया गया है।
देहरादून के बलजीत सोनी को अल्पसंख्यक आयोग में जगह दी गई है, जबकि काशीपुर की सीमा चौहान को मत्स्य विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता भावना मेहरा और अशोक वर्मा को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
राजनीतिक संदेश और रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नियुक्तियां केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम हैं। आगामी चुनावों और संगठन को मजबूत करने के लिहाज से सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।
इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और कार्यकर्ताओं के मनोबल को ध्यान में रखा है। खासतौर पर ओबीसी, महिला, अनुसूचित जाति और जनजातीय वर्ग से जुड़े आयोगों में नियुक्तियां यह संकेत देती हैं कि सरकार सामाजिक संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रही है।
धामी सरकार के इस कदम को आने वाले समय में और भी नियुक्तियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अभी कुछ और नामों की घोषणा भी की जा सकती है, जिससे पार्टी संगठन को और मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, दो चरणों में 21 नेताओं को जिम्मेदारी देकर सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह संगठन और शासन दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। अब देखना होगा कि इन नियुक्तियों का असर आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनावी माहौल पर किस तरह पड़ता है।
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