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उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: मोटरयान नियम 2026, बस खरीद, मदरसा मान्यता और नई नीतियों को मंजूरी

उत्तराखंड सरकार की गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जो राज्य के परिवहन, शिक्षा, वन, शहरी विकास और राजस्व जैसे विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे। बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी साझा की। इन फैसलों को राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कैबिनेट के सबसे प्रमुख निर्णयों में उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी देना शामिल है। इस नियमावली के तहत अब प्रवर्तन अधिकारियों को भी वर्दी पहनना अनिवार्य होगा, जिससे उनकी पहचान स्पष्ट हो सके और कार्यवाही में पारदर्शिता आए। इसके अलावा परिवहन विभाग से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण फैसला बसों की खरीद को लेकर लिया गया। पहले जहां 100 बसों की खरीद को मंजूरी थी, वहीं अब जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने के बाद 109 बसें खरीदी जाएंगी। इससे राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

शहरी विकास से जुड़े एक बड़े फैसले के तहत कुंभ मेले के आयोजन के लिए कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। अब मेला अधिकारी एक करोड़ रुपये तक के कार्यों को स्वीकृत कर सकेंगे, जबकि मंडलायुक्त पांच करोड़ रुपये तक के कार्यों को मंजूरी दे सकेंगे। इससे कुंभ मेले की तैयारियों में तेजी आने की उम्मीद है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समय की बचत होगी।

आबकारी नीति के तहत व्यय दर 6 प्रतिशत निर्धारित किए जाने के अनुरूप वाणिज्य कर विभाग ने अपनी नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी है। इस बदलाव से राजस्व संग्रहण प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता आने की संभावना जताई जा रही है।

वन विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय भी कैबिनेट बैठक में लिए गए। उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन करते हुए वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि वन आरक्षी की आयु सीमा 18 वर्ष से बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई है। इसके अलावा जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को अब सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा, जिससे पूर्व सैनिकों को भी इस प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व मिलेगा।

शिक्षा क्षेत्र में भी कैबिनेट ने अहम फैसले लिए हैं। उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है, और अब इसके तहत कक्षा 1 से 8 तक के 452 मदरसों को जिला स्तर से मान्यता दी जाएगी। वहीं कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। इस संबंध में जल्द ही एक अध्यादेश लाया जाएगा। इस कदम को शिक्षा प्रणाली में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अलावा प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया है। अब किसी भी भर्ती या चयन प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट केवल एक वर्ष तक ही वैध मानी जाएगी। इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करने वाली नियमावली को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इसके साथ ही सहायक अध्यापकों के लिए नई सेवा नियमावली को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा शर्तों में स्पष्टता आएगी।

लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती से संबंधित जानकारी कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई। इसके अलावा वर्कचार्ज कर्मचारियों से जुड़े निर्णय पर हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए स्टे की भी जानकारी दी गई।

ठेकेदारों के लिए भी कैबिनेट ने राहत भरा फैसला लिया है। अब डी श्रेणी के ठेकेदारों को पहले की तुलना में अधिक मूल्य के कार्य दिए जा सकेंगे। पहले जहां यह सीमा एक करोड़ रुपये थी, अब इसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे छोटे ठेकेदारों को अधिक अवसर मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब 21 अशासकीय कॉलेजों को भी इसका लाभ देने का निर्णय लिया गया है। इससे शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने एक नई नीति को भी मंजूरी दी है।

वन सीमा क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए “वन सीमा मौन पालन मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव-वन्य जीव संघर्ष नियमावली 2026” को स्वीकृति दी गई है। इस योजना से स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी और हाथियों जैसे जंगली जानवरों के साथ होने वाले संघर्ष में कमी आने की संभावना है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड कैबिनेट के ये फैसले राज्य के समग्र विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इन निर्णयों का प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

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