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UP : योगी के राज में चल रहा आज़म ख़ान का दबदबा, विभागों में खुलेआम चल रहा बंदरबांट | Nation One
UP : उत्तर प्रदेश में जहां योगी सरकार का अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र का ज़ोर चलता है वही उसी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, रामपुर और ग़ाज़ीपुर के पॉश इलाक़ों में आलीशान बिल्डिंग, एयर कंडीशंड प्रेक्षागृह और करोड़ों का बजट पूछने वाला कोई नहीं है. वहीं चौकने वाली बात तो यह है कि यह सब संपत्ति उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी और फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल अकादमी सर्वेसर्वा सचिव शौक़त अली के है.

जहां एक तरफ़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक्शन मोड में रहते है तो वही दूसरी तरफ़ उनके ही कुछ अधिकारियों द्वार उनके नाक के नीचे उन्हीं के भाषा विभाग की अकादमियों में बंदर बाँट का खेल चला रहे है, और अपनी मनपसंद जगहों पर ट्रांसफ़र ले रहे है जिसकी योगी जी को कानों कान भनक नहीं है.

वही खबर ये भी है कि अकादमियों के सचिव बनने के लिए अपर मुख्य सचिव को उनके निजी सचिव के मार्फत पैसे पहुंचाए जाते हैं, जो बिना किसी नियम के बीस बरसों से अनवरत उनके साथ संलग्न हैं। अकादमी का सचिव बनते ही नवनिर्वाचित सचिव की अंधाधुंध कमाई शुरू होती है. चंद महीनों बाद घोर भ्रष्टाचार और शिकायदों के बाद यदि उसे हटाना पड़ता है तो नई नियुक्ति मय पैसे के तैयार होती है। चंद महीनों में पुराना हटाया हुआ सचिव फिर नई गड्डी चढ़ा कर अपना दावा कर देता है और उर्दू अकादमी में ये चक्र चलता ही जा रहा है।

सबूत के तौर पर देखिए, एक ही आदमी तीन-तीन चार-चार बार महीनों के अंतराल में सचिव बनाये जाते है। प्रमाणस्वरूप वर्तमान सचिव शौकत अली को चौथी बार सचिव बनाया गया है. सवाल यह उठता है अगर ये इतने ही योग्य थे तो इन्हें तीन बार हटाने की क्या जरूरत पड़ी।

वही बता दें कि शौकत अली घोषित तौर पर जेल में निरुद्ध पूर्व मंत्री आज़म खान के वफादार हैं और उनका नाम और डर दिखा कर काम करते रहे हैं , यहां तक कर्मचारियों को डराना हो या दबाव में लेना हो तो वो आने वाली सरकार का नाम ,आज़म खान का रुतबा और अपनी हैसियत तथा पहचान दिखा कर सबको चुप करा देते हैं।

शौकत अली का रुतबा इस बात से जाहिर हो जाता है की  किसी शहर के सांसद और दलितों पिछड़ों के मशहूर नेता,  केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर का वो अक्सर मजाक बनाते रहते हैं क्योंकि लगभग साल भर पहले मंत्री कौशल किशोर ने उनकी हरकतों की लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी. जिसकी वजह से संभवत वो अपने सचिव पद से हटाए गए थे, मगर कुछ महीनों में ही उनकी अपनी सचिव की कुर्सी पर वापसी ने साबित कर दिया कि भाजपा सरकार में भाजपा के मंत्रियों से ज्यादा उनके हाथ लंबे हैं।

इस पूरे खेल की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं अपर मुख्य सचिव जितेंद्र कुमार के निजी सचिव जुलकदर अब्बास. यह जुलकदर अब्बास लगभग 20 सालों से अपर मुख्य सचिव से जुड़े हैं न कोई ट्रांसफर न बदलाव । आखिर इतनी लंबी सांठ गांठ कैसे और क्यों हुई ?

वही बता दें कि यह जुलकदर अब्बास ही बिचौलिए का काम, लेन देन तय करते हैं और बदले में अपने तथा अपने रिश्तेदारों के लिए मनमाफिक नौकरियां, आवंटित धन के अधिकतर कार्यक्रम आदि हासिल करते हैं ।

इनके द्वारा ताश के पत्तों की तरह सचिव बदले जाते हैं और हर बदलाव में नया पैसा कमाया जाता है , इस बात का भी कोई जवाब नहीं कि उस आदमी को हटाया क्यों जाता है जब उसी को फिरसे सचिव बनाना है. और ये एक बार नहीं बल्कि चार चार बार होता चला आ रहा है . वही महज कुछ अंतराल में इनके द्वारा आदिल हसन (चार बार सचिव), शौकत अली (चार बार सचिव ) के अलावा जुहैर बिन सगीर एवं मोहम्मद कलीम सचिव बनाए जा चुके हैं .

हालत इतनी बुरी है कि अगर कोई उनके पास काम कराने जाता है तो जो सचिव हस्ताक्षर आदि करके फाइल फाइनल करता है उसी के दस दिन बाद वह फिरसे नया सचिव मिलता है और पुराने सारे कागज रिकॉर्ड से हटा दिए जाते हैं। जिससे काम करने वाले आदमी को कई बार दौड़भाग करके नए सिरे से अपनी बात बतानी पड़ती है और फिर नये सचिव द्वारा पुराने सचिव के हर आदेश को सीधा नकार दिया जाता है या कहा जाता है कि आप नए सचिव को अन्य तरीकों से खुश कीजिए.

यह ताबड़तोड़ सचिवों की तैनाती ही कमाई का ज़रिया है और इसी के एवज में निजी सचिव ज़ुलकदर अब्बास के भाई की प्रयागराज स्थित संस्था और तीन चार फर्जी संस्थाओं को लाखों रुपए कार्यक्रमों के नाम पर एडवांस दे दिए जाते हैं । इन्हीं संस्थाओं से नगद कमीशन प्रतिशत तक वापस ले लिया जाता है .

धीरे धीरे सचिवों के मुंह में भ्रष्टाचार का भयानक खून लग चुका है, नए सचिव शौकत अली ने आते ही बीस हजार रुपए का अपना मानदेय बढ़वा लिया है और साथ ही अकादमी के वाहनों को कूड़ा दिखा के 35 हजार रुपए सिर्फ टेक्सियों में उड़ाए जा रहे हैं जो उनके निजी काम और सेवा में दिन रात दौड़ती हैं

यही नहीं अकादमी के अपने मीडिया सेंटर द्वारा बनवाए जा रहे यू ट्यूब कार्यक्रमों का ठेका एक इस्लामिक प्रचार प्रसार वाले लोकल चैनल इसलाह टीवी को दे दिया है ताकि इन्हीं पैसों से वो अपनी ग्रोथ कर सके । यह चैनल एक दरगाह से जुड़े कुछ लड़कों द्वारा चलाया जाता है जो शौकत अली के बहुत खास हैं और जिनसे ये मनमाफिक काम कराते हैं.

एक बड़ा आरोप यह भी लगा है कि उर्दू अकादमी की कमेटी द्वारा निरस्त किए जा चुके एक अनुपयोगी सॉफ्टवेयर के टेंडर को जो लगभग 15 से 20 लाख का है, पुरानी फाइल गायब करा के पुनः खुलवाने की कोशिश हो रही है और उसमें सारे सरकारी नियमों को दरकिनार करने के जुगाड रचे जा रहे हैं.

रामपुर, गाजीपुर और लखनऊ  में वर्तमान सचिव शौकत अली ने अपार संपत्तियां खड़ी कर लीं हैं, जिनकी जांच की आवश्यकता है क्योंकि RTI द्वारा उसमें स्पष्ट सूचना तक उपलब्ध नहीं हो पाती है.

यही नहीं, सचिव शौकत अली तो इतनी तेज़ भाग रहे हैं कि बेरोजगारी के इस आलम में आनन फानन अकादमी में अपने और ज़ुल्कदर अब्बास के लोगों की धड़ाधड़ नियुक्तियां कर रहे हैं और साजिशों में लगे रहते हैं कि पुराने कर्मचारियों को कैसे उत्पीड़ित करके हटाया जाय.

मुख्यमंत्री योगी जी के अंतर्गत आने वाले भाषा विभाग में सरकारी धन की अपार लूट चल रही है, मगर दिक्कत ये है कि जिस अपर मुख्य सचिव की जिम्मेदारी ये सब देखने की थी या फिर मुख्यमंत्री तक सही तथ्य पहुंचाने की...वो अपने निजी सचिव के मार्फत खुद इस रैकेट में शामिल है. ऐसे में जनता के मेहनत के पैसे मुशायरों में उड़ें या पान की पीक में उगल दिए जाएं, इसकी परवाह किसे है बस रामपुर ,लखनऊ और गाजीपुर की कोठियां बढ़ती जाएंगी. और इसपर कार्रवाई करने वाला कोई नहीं होगा.

संस्थाएं जिनको पैसा दिया गया गुलज़ार फाउंडेशन बाराबंकी 5 लाख 31 अगस्त को 2.5 लाख जारी किए गए अल हुदा एजुकेशन सोसाइटी प्रयागराज (ज़ुल्क़दर के भाई की संस्था) 5 सितंबर को 2.5 जारी निर्बल वर्ग सेवा समिति (शौकत अली के जानने वाले, रामपुर) 3 लाख 1.5 को सितंबर को जारी जी जी वेलफेयर ट्रस्ट (बाराबंकी) 5 लाख 2.5 लाख 8 अक्टूबर को जारी

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