उत्तरकाशी के केदार घाट पर अधजले शवों को खा रहे आवारा कुत्ते, बढ़ा खतरा
उत्तरकाशी के केदार घाट पर गंभीर लापरवाही, अधजले शवों को खा रहे आवारा कुत्ते, लोगों में दहशत
उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय स्थित केदार घाट पर एक बेहद चिंताजनक और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां आवारा कुत्ते भागीरथी नदी के किनारे अधजले शवों के अवशेषों को खाते हुए देखे जा रहे हैं। इस स्थिति ने न केवल धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाई है, बल्कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अंतिम संस्कार के बाद शवों के बचे हुए हिस्सों की ठीक से सफाई नहीं की जा रही है। यही कारण है कि घाट पर अधजले अवशेष खुले में पड़े रहते हैं, जिन्हें आवारा कुत्ते खा रहे हैं।
गंगा विचार मंच ने जताई चिंता
गंगा विचार मंच से जुड़े लोगों ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। मंच के प्रांत संयोजक लोकेंद्र बिष्ट ने कहा कि यह स्थिति बेहद खतरनाक होती जा रही है।
उन्होंने बताया कि जब कुत्तों के मुंह में इंसानी मांस का स्वाद लग जाता है, तो उनका व्यवहार आक्रामक हो सकता है और वे आम लोगों पर भी हमला करने लगते हैं। यही कारण है कि हाल के दिनों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।
कुत्तों के हमले बढ़े, 18 लोग घायल
रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ दिनों में आवारा कुत्तों ने करीब 18 लोगों को काटकर घायल कर दिया है। यह आंकड़ा स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा की भावना को बढ़ाने के लिए काफी है। घाट के आसपास रहने वाले लोग और वहां आने वाले श्रद्धालु अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। खासतौर पर सुबह और शाम के समय जब कुत्तों के झुंड सक्रिय होते हैं, तब खतरा और बढ़ जाता है।
धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा
भागीरथी नदी के किनारे स्थित यह घाट धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां अंतिम संस्कार के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं। अंतिम संस्कार जैसी पवित्र प्रक्रिया के बाद यदि अवशेषों का सही प्रबंधन नहीं होता, तो यह एक गंभीर सामाजिक समस्या बन जाती है।
कोविड काल जैसी स्थिति फिर
लोकेंद्र बिष्ट ने यह भी बताया कि इस तरह की स्थिति कोविड-19 के दौरान भी देखने को मिली थी। उस समय कई तरह की बंदिशें थीं और अंतिम संस्कार जल्दबाजी में किए जा रहे थे, इसलिए कुछ हद तक स्थिति को समझा जा सकता था। लेकिन वर्तमान समय में, जब सभी व्यवस्थाएं सामान्य हो चुकी हैं, तब भी ऐसी लापरवाही का सामने आना बेहद चिंताजनक है।
प्रशासन और पालिका से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन और नगर पालिका से इस मामले में तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- केदार घाट पर अंतिम संस्कार के बाद नियमित और सख्त सफाई व्यवस्था लागू की जाए।
- अधजले शवों के अवशेषों को पूरी तरह से नष्ट करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके पुनर्वास के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
- घाट क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन की जिम्मेदारी और आगे का रास्ता
यह मामला केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, धार्मिक आस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़ा मुद्दा है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कुत्तों के हमले बढ़ सकते हैं और किसी बड़ी दुर्घटना की संभावना भी से इनकार नहीं किया जा सकता।
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