देहरादून में वकीलों की हड़ताल तेज, DM की कार्रवाई के विरोध में कोर्ट कामकाज ठप
देहरादून में वकीलों की हड़ताल तेज, DM की कार्रवाई के खिलाफ सिविल कोर्ट तक कामकाज ठप
देहरादून में अधिवक्ताओं की हड़ताल लगातार तेज होती जा रही है। जिला प्रशासन और बार एसोसिएशन के बीच चल रहे विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। पहले जहां वकीलों ने केवल रेवेन्यू और रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों का बहिष्कार किया था, वहीं अब उन्होंने सिविल कोर्ट के कामकाज से भी दूरी बना ली है।
इस हड़ताल की वजह से कोर्ट में आने वाले फरियादियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूर-दराज से न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले लोग बिना किसी सुनवाई के ही वापस लौटने को मजबूर हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद दून बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद शर्मा के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा है। 25 मार्च को कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में “मैसेज दून वैली बनाम सरकार” नामक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ टिप्पणियां की थीं, जिन्हें प्रशासन ने आपत्तिजनक माना।
जिलाधिकारी ने इन टिप्पणियों को न्यायालय की गरिमा के खिलाफ बताते हुए इसे प्रोफेशनल मिसकंडक्ट की श्रेणी में रखा। इसके बाद इस मामले को अनुशासन समिति के पास भेज दिया गया। साथ ही जांच पूरी होने तक उनके प्रैक्टिस अधिकारों को निलंबित करने पर भी विचार करने की सिफारिश की गई है।
बार एसोसिएशन का कड़ा विरोध
इस कार्रवाई के खिलाफ देहरादून बार एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन का कहना है कि जिलाधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई एकतरफा और अनुचित है। बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि प्रशासन के अधीन आने वाले राजस्व न्यायालयों और तहसीलों में व्यापक भ्रष्टाचार फैला हुआ है। दाखिल-खारिज और विरासत से जुड़े कई मामलों में महीनों तक सुनवाई नहीं होती और लोगों को बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं।
एसोसिएशन का यह भी कहना है कि इन समस्याओं को नजरअंदाज कर प्रशासन अधिवक्ताओं पर कार्रवाई कर रहा है, जो पूरी तरह गलत है।
हड़ताल कब तक जारी रहेगी?
बार एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इससे पहले 4 अप्रैल को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जिलाधिकारी के स्थानांतरण तक बहिष्कार जारी रहेगा। 7 अप्रैल तक राजस्व न्यायालयों और रजिस्ट्रार कार्यालयों में कामकाज ठप रखने का फैसला लिया गया था। हालांकि, बाद में हुई एक और बैठक में इस हड़ताल को और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिससे अब सिविल कोर्ट का कामकाज भी प्रभावित हो गया है।
बार अध्यक्ष का बयान
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुकरेती ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रेमचंद शर्मा सात बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और बार चैंबर समिति के भी अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा कोई टिप्पणी की गई थी, तो जिलाधिकारी को पहले इसकी जानकारी बार एसोसिएशन को देनी चाहिए थी। सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं है।
आम जनता पर सबसे ज्यादा असर
इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर देखने को मिल रहा है। सिविल कोर्ट, रेवेन्यू कोर्ट और रजिस्ट्रार कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप है। लोग अपने जरूरी कामों के लिए कोर्ट पहुंच रहे हैं, लेकिन वकीलों की गैरमौजूदगी के कारण उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है। कई मामलों में तारीखें आगे बढ़ रही हैं, जिससे न्याय मिलने में देरी हो रही है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी कठिन है, क्योंकि उन्हें लंबी दूरी तय करके आना पड़ता है और फिर बिना काम के वापस लौटना पड़ता है।
प्रशासन बनाम वकील: टकराव बढ़ा
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और वकीलों के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। एक ओर प्रशासन इसे अनुशासन और न्यायालय की गरिमा का मामला बता रहा है, वहीं दूसरी ओर वकील इसे अपने सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं।
यदि जल्द ही इस विवाद का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है और न्यायिक व्यवस्था पर इसका असर लंबे समय तक पड़ सकता है।
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