उत्तराखंड में बढ़ते सड़क हादसे: 2025 में 1242 मौतें, 2000 से ज्यादा घायल
देहरादून- उत्तराखंड में वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सड़क हादसों के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक राज्य में 36 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 130 से अधिक लोग घायल हुए हैं और तीन अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बीते वर्ष 2025 में राज्यभर में 1846 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 1242 लोगों की जान गई और 2056 लोग घायल हुए।
राज्य सरकार के लिए यह स्थिति गंभीर चुनौती बनती जा रही है। लगातार हो रही समीक्षा बैठकों में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने, ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने, सड़कों की मरम्मत, गड्ढामुक्त अभियान, सीसीटीवी कैमरे लगाने और पहाड़ी मार्गों पर क्रैश बैरियर मजबूत करने जैसे निर्देश दिए गए हैं।
किन जिलों में सबसे ज्यादा हादसे?
2025 के आंकड़ों के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
देहरादून: 450 हादसे, 229 मौतें
उधम सिंह नगर: 424 हादसे, 295 मौतें
हरिद्वार: 412 हादसे, 283 मौतें
इनके अलावा नैनीताल चौथे स्थान पर रहा, जहां 257 दुर्घटनाएं और 166 मौतें दर्ज की गईं।
पर्वतीय जिलों जैसे टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में भी दुर्घटनाओं और मौतों के आंकड़े चिंताजनक रहे।
क्यों बढ़ रहे हैं हादसे?
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में ओवरस्पीड, थकान में ड्राइविंग, खराब मौसम, संकरे रास्ते और वाहन मेंटेनेंस की कमी बड़ी वजहें हैं। मैदानी इलाकों में तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, नशे में वाहन चलाना और कम उम्र के चालकों द्वारा वाहन चलाना हादसों का प्रमुख कारण बन रहा है।
क्या हो सकते हैं समाधान?
पर्वतीय मार्गों पर रात में भारी वाहनों की आवाजाही सीमित करना
अनुभवी चालकों को ही पहाड़ी रूट पर अनुमति
सख्त ओवरस्पीड निगरानी
नियमित वाहन फिटनेस जांच
संवेदनशील स्थानों पर क्रैश बैरियर और चेतावनी संकेत
आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो सड़क हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। राज्य में सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना अब प्रशासन और आम जनता—दोनों की साझा जिम्मेदारी बन गई है।









