व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कमी से होटल-रेस्तरां संकट में, मेनू से 70% फूड आइटम हटाए
हल्द्वानी में कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति ठप, होटल-रेस्तरां संचालक परेशान
हल्द्वानी: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब स्थानीय बाजारों तक भी पहुंचने लगा है। शहर में व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने से होटल और रेस्तरां संचालक भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। गैस की कमी के कारण कई होटल संचालकों को अपने मेनू कार्ड से लगभग 70 प्रतिशत फूड आइटम हटाने पड़े हैं।
व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस सिलेंडर की आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो होटल और रेस्तरां का संचालन करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। कई छोटे होटल और ढाबे तो पहले ही सीमित संसाधनों के सहारे काम चला रहे हैं।
मंगलवार से नहीं मिल रहे सिलेंडर
जानकारी के अनुसार मंगलवार से शहर में कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति बंद है। गैस एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे होटल और रेस्तरां संचालकों को सिलेंडर नहीं मिल रहे। व्यापारियों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें यह भी पता नहीं है कि यह संकट कितने दिन तक रहेगा। गैस एजेंसियों से भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है।
मेनू कार्ड से हटाए गए 70 प्रतिशत आइटम
गैस की कमी का असर सीधे तौर पर खाने-पीने के कारोबार पर पड़ा है। कई होटल और रेस्तरां संचालकों ने अपने मेनू कार्ड से लगभग 70 प्रतिशत फूड आइटम हटा दिए हैं। अब होटल में केवल वही भोजन तैयार किया जा रहा है जिसे कम गैस में या वैकल्पिक साधनों से बनाया जा सके। कई लोकप्रिय व्यंजन फिलहाल ग्राहकों को उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। होटल संचालकों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ग्राहकों की संख्या भी कम हो सकती है, जिससे व्यापार पर गंभीर असर पड़ेगा।
वैकल्पिक साधनों का सहारा
गैस सिलेंडर की कमी के चलते होटल संचालक अब वैकल्पिक इंतजाम करने में जुट गए हैं। कुछ होटल मालिकों ने अपने यहां तंदूर की संख्या बढ़ा दी है ताकि रोटी और अन्य तंदूरी व्यंजन उसी में बनाए जा सकें। इसके अलावा कई लोग इंडक्शन चूल्हा, डीजल बर्नर और माइक्रोवेव ओवन जैसे उपकरण खरीद रहे हैं ताकि किसी तरह से खाना बनाने का काम जारी रखा जा सके। हालांकि इन विकल्पों से काम चलाना आसान नहीं है। इनकी क्षमता सीमित होती है और बिजली या डीजल का खर्च भी ज्यादा आता है।
छोटे कारोबारियों पर ज्यादा असर
गैस सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे होटल और ढाबों पर पड़ रहा है। बड़े रेस्तरां किसी तरह वैकल्पिक साधनों से काम चला रहे हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। कई छोटे होटल संचालकों का कहना है कि उनके पास अतिरिक्त उपकरण खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। ऐसे में अगर गैस की आपूर्ति जल्द शुरू नहीं हुई तो उन्हें अपना कारोबार अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ सकता है।
ग्राहकों को भी हो रही परेशानी
इस संकट का असर केवल होटल संचालकों पर ही नहीं बल्कि ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। मेनू से कई लोकप्रिय व्यंजन हट जाने के कारण ग्राहकों को अपनी पसंद का खाना नहीं मिल पा रहा है। कुछ लोग मजबूरी में उपलब्ध सीमित विकल्पों में से ही खाना ऑर्डर कर रहे हैं, जबकि कई ग्राहक दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।
जल्द समाधान की उम्मीद
होटल और रेस्तरां संचालकों को उम्मीद है कि प्रशासन और गैस कंपनियां जल्द ही इस समस्या का समाधान निकालेंगी। उनका कहना है कि अगर सिलेंडर की नियमित आपूर्ति शुरू हो जाए तो कारोबार सामान्य हो सकता है।
फिलहाल होटल संचालक सीमित संसाधनों और वैकल्पिक उपायों के सहारे अपने व्यवसाय को किसी तरह चलाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहा तो फूड इंडस्ट्री पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
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