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नयागांव में पीलिया का प्रकोप: 10 वर्षीय बच्चे की मौत, 40 से अधिक बच्चे बीमार, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

नयागांव में पीलिया का कहर: 10 वर्षीय बच्चे की मौत, 40 से अधिक बच्चों में बीमारी के लक्षण

एक मासूम की मौत के बाद गांव में फैला भय का माहौल

उधम सिंह नगर जिले के नयागांव में पीलिया जैसी गंभीर बीमारी के बढ़ते मामलों ने ग्रामीणों और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बीमारी की चपेट में आए 10 वर्षीय बालक की दिल्ली में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं। गांव में 40 से अधिक बच्चों में बुखार, कमजोरी और पीलिया जैसे लक्षण मिलने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष जांच अभियान शुरू कर दिया है और बीमारी के स्रोत का पता लगाने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) का गठन किया गया है।

पीलिया से संक्रमित 10 वर्षीय अल्तमस की उपचार के दौरान मौत

जानकारी के अनुसार नयागांव निवासी इश्तकार का 10 वर्षीय पुत्र अल्तमस कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। परिजनों ने उसकी जांच सितारगंज की एक निजी लैब में कराई, जहां पीलिया की पुष्टि हुई।इसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन उसे दिल्ली लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।अल्तमस की मौत के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी तेजी से फैल रही है और बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

एक ही परिवार के दो बच्चे संक्रमित

परिजनों के अनुसार मृतक अल्तमस की बहन भी पीलिया से संक्रमित पाई गई है। उसका उपचार फिलहाल रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।एक ही परिवार के दो बच्चों में संक्रमण मिलने के बाद ग्रामीणों में बीमारी को लेकर चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बीमारी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

40 से अधिक बच्चों में बीमारी के लक्षण

ग्राम प्रधान मैसर जहां के अनुसार गांव में करीब 40 से अधिक बच्चे बुखार, कमजोरी, शरीर दर्द और सीने में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।कई बच्चों की जांच में पीलिया के लक्षण सामने आए हैं। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को विभिन्न निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य बच्चों का उपचार स्थानीय स्तर पर जारी है।

अस्पताल में भर्ती बच्चों में मोहम्मद अरमान (14 वर्ष), सुप्यान शैरी (13 वर्ष), मोहम्मद रहमान (8 वर्ष), मोहम्मद साद (18 वर्ष), मोहम्मद जुनैर (12 वर्ष), मोहम्मद उजैफ (9 वर्ष) और मुजाहिद (14 वर्ष) सहित कई बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा कई बच्चों को उप जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने पीलिया से मिलते-जुलते लक्षण पाए।

दूषित पेयजल पर गहराया संदेह

गांव में अचानक बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने के बाद ग्रामीणों ने दूषित पेयजल आपूर्ति को बीमारी का संभावित कारण बताया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गंदे और संक्रमित पानी की आपूर्ति के कारण बीमारी फैल सकती है।हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक बीमारी के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विभाग की टीम पानी के नमूनों की जांच और अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों के जरिए बीमारी के वास्तविक स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई है।

स्वास्थ्य विभाग ने गठित की रैपिड रिस्पांस टीम

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. के.के. अग्रवाल ने मामले को गंभीर मानते हुए रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया है।इस टीम में डॉ. सुधीर गुप्ता, डॉ. आर.डी. भट्ट, डॉ. अतुल कुमार, एपिडिमियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष कुमार पांडेय और माइक्रोबायोलॉजिस्ट रजनी भट्ट को शामिल किया गया है।इसके अलावा आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ और रक्त जांच टीमों को भी अभियान में लगाया गया है ताकि गांव के हर परिवार तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

घर-घर जाकर होगा स्वास्थ्य सर्वे

स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में घर-घर जाकर सर्वे करेगी और संदिग्ध मरीजों की पहचान करेगी। मरीजों के रक्त नमूने लेकर जांच कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर मौके पर ही दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल भेजने की व्यवस्था भी की गई है। विभाग बीमारी के फैलाव की श्रृंखला और संक्रमण के स्रोत का वैज्ञानिक अध्ययन कर रहा है।

पेयजल व्यवस्था की भी होगी जांच

स्वास्थ्य विभाग ने जल संस्थान को पत्र लिखकर पेयजल स्रोतों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जलापूर्ति लाइनों में क्लोरीनेशन कराने और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत करने को कहा गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि पीलिया अक्सर दूषित पानी और अस्वच्छ वातावरण के कारण फैलता है। ऐसे में जल स्रोतों की जांच और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

ग्रामीणों ने की स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग

गांव के लोगों ने प्रशासन से विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने, सभी बच्चों की जांच कराने और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यापक स्वास्थ्य जांच नहीं कराई गई तो बीमारी और अधिक लोगों को अपनी चपेट में ले सकती है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य संक्रमण को फैलने से रोकना और प्रभावित बच्चों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराना है।

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