देहरादून में पांच साल से चल रहा था नकली दवाओं का खेल, केंद्रीय इनपुट के बाद खुलासा
देहरादून। सहस्रधारा रोड स्थित एक कथित हर्बल केंद्र और उससे जुड़ी इकाई पर बड़ी कार्रवाई में अवैध और संदिग्ध दवाओं का जाल उजागर हुआ है। छापेमारी में बिना पंजीकरण संचालित गतिविधियों, फर्जी ब्रांडिंग और भारी मात्रा में दवाओं के स्टॉक के संकेत मिले हैं।
कार्रवाई संयुक्त टीम ने की, जिसमें केंद्रीय आयुष मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के इनपुट के बाद स्थानीय अमले ने दबिश दी। जांच में पाया गया कि जिस नाम से केंद्र संचालित बताया जा रहा था, उसका वैध पंजीकरण उपलब्ध नहीं था। परिसर से आयुर्वेद और होम्योपैथी से जुड़ी दवाओं का बड़ा भंडार बरामद हुआ, जिनके दस्तावेज और लाइसेंस संबंधी कागजात मौके पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
जांच दल को तलाशी के दौरान एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी और नोट गिनने की मशीन भी मिली। इसकी सूचना आयकर विभाग को दी गई, जिसके बाद कर अधिकारियों ने भी जांच शुरू कर दी है। बरामद दवाओं के सैंपल प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं, ताकि उनकी गुणवत्ता और संभावित मिलावट की पुष्टि हो सके।
प्रारंभिक पड़ताल में यह भी संकेत मिले हैं कि उत्पादों की आपूर्ति राज्य से बाहर तक की जा रही थी। विभिन्न राज्यों के औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों को सतर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि बिक्री पर रोक लगाई जा सके और नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने लाई जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की व्यापक जांच जारी है—जिसमें लाइसेंस, कर अनुपालन, परिवहन दस्तावेज और आपूर्ति शृंखला की पड़ताल शामिल है। दोषियों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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