Uttarakhand : उत्तराखंड में शिक्षा क्षेत्र में हो रही अनियमितताओं पर जिला प्रशासन और पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रशासन ने जबरन शैक्षिक सामग्री बेचने, जीएसटी चोरी, और फर्जी प्रकाशन जैसे गंभीर आरोपों के तहत कई पुस्तक विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। यह कार्रवाई डीएम के निर्देश पर की गई, जिसमें कई प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया है।
बीते कुछ महीनों से अभिभावकों द्वारा लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी स्कूलों और किताब विक्रेताओं के बीच सांठगांठ के कारण महंगी और अनावश्यक शैक्षिक सामग्री छात्रों को खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई प्रतिष्ठान उन किताबों की बिक्री कर रहे थे, जिनके आईएसबीएन नंबर (ISBN) तक ट्रैक नहीं किए जा सके, जिससे उनकी प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल उठने लगे।
Uttarakhand : किन दुकानों पर गिरी गाज?
प्रशासन ने यूनिवर्सल बुक डिपो, नेशनल बुक डिपो, ब्रदर पुस्तक भंडार और एशियन बुक डिपो जैसी बड़ी दुकानों को सील कर दिया है। इन प्रतिष्ठानों पर निजी स्कूलों से गठजोड़ कर महंगी किताबें और स्टेशनरी बेचने के आरोप लगे थे। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें जबरदस्ती महंगी और गैर-जरूरी किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता था, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ रहा था।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन अब उन निजी स्कूलों की भी जांच कर रहा है जो किताब विक्रेताओं के साथ मिलीभगत कर अवैध तरीके से मुनाफा कमा रहे थे। इन स्कूलों पर जल्द ही कड़ी प्रवर्तन कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा के नाम पर चल रहे इस अवैध व्यापार को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
Uttarakhand : प्रशासन की सराहना
इस सख्त कार्रवाई से छात्रों के माता-पिता ने राहत की सांस ली है। उन्होंने प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी जरूरी है। वहीं, प्रशासन ने भी अभिभावकों से अपील की है कि अगर कोई भी स्कूल या दुकान अनियमित तरीके से महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाता है, तो तुरंत इसकी शिकायत करें।
प्रशासन अब शिक्षा विभाग के साथ मिलकर इस पूरे सिस्टम में सुधार लाने की योजना बना रहा है। सभी स्कूलों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे केवल निर्धारित पाठ्यक्रम की किताबें ही अपनाएं और किसी भी तरह की अनावश्यक किताबें थोपने का प्रयास न करें।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब यह देखना होगा कि शिक्षा के नाम पर चल रहे इस गोरखधंधे पर पूरी तरह लगाम लग पाती है या नहीं।
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