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मेरठ CMO कार्यालय में 'कमीशन' का खेल, ACMO और चीफ फार्मासिस्ट ने मांगी 15% घूस!

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'डबल इंजन' सरकारें लगातार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा करती रही हैं। इसके बावजूद, राज्य में रिश्वतखोरी और घूसखोरी का धंधा बेरोकटोक जारी है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आया है, जहां स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में मदर केयर कीट के एक टेंडर के रनिंग बिल्स पर 15 प्रतिशत कमीशन की डिमांड की गई है, जिससे सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है।

क्या है पूरा मामला?

पूरा मामला चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मेरठ स्थित CMO कार्यालय से जुड़ा है। यहां एसीएमओ (ACMO) महेश चंद्र और चीफ फार्मासिस्ट यदुवीर सिंह पर 'मदर केयर कीट' के टेंडर को लेकर रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। यह टेंडर 15 लाख 33 हजार 180 रुपए का था। एसीएमओ और चीफ फार्मासिस्ट ने टेंडर के रनिंग बिल्स पर सीधा 15 प्रतिशत कमीशन की मांग की।

मामले के खुलासे के लिए भेजे गए एक अंडरकवर रिपोर्टर के अनुसार, एसीएमओ महेश चंद्र ने पहले टेंडर की बात करने के लिए रिपोर्टर को चीफ फार्मासिस्ट यदुवीर सिंह के पास भेजा। चीफ फार्मासिस्ट ने सीधी बात करते हुए रनिंग बिल्स पर 15 प्रतिशत कमीशन देने की मांग रखी।

एसीएमओ ने किया बड़ा खुलासा

रिपोर्टर से बातचीत के दौरान, एसीएमओ महेश चंद्र ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस 15 प्रतिशत कमीशन में CMO साहब भी शामिल हैं।

एसीएमओ ने यह भी कहा कि वे इस टेंडर के संबंध में पहले ही किसी और कंपनी से बात कर चुके हैं और अगली बार टेंडर देने का आश्वासन दिया। हालांकि, उन्होंने अगली बार भी 15 प्रतिशत कमीशन की मांग बरकरार रखी।

सरकारी दावों पर सवाल

यह घटना 'डबल इंजन' सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखने के दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। सरकारी कार्यालयों में उच्च पदस्थ अधिकारियों द्वारा खुलेआम कमीशन की मांग किया जाना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति जमीनी स्तर पर कितनी सफल हो पाई है।

जनता के स्वास्थ्य से जुड़े विभाग में इस तरह की रिश्वतखोरी राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करती है। यह घटना दर्शाती है कि सरकारों के नाक के नीचे चल रहे घूसखोरी के इस धंधे को सरकार विफल करने में नाकाम साबित हो रही है।

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